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AIIMS बिलासपुर का पहला दीक्षा समारोह, राष्ट्रपति मुर्मू ने 89 डॉक्टर्स को दी डिग्री

बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS बिलासपुर के पहले दीक्षा समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बैच 2020 के 89 डॉक्टरों को सम्मानित किया। समारोह में पांच मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किए गए, जबकि अन्य विद्यार्थियों को डिग्रियां वितरित की गईं। AIIMS बिलासपुर के इतिहास में यह पहला दीक्षा समारोह रहा, जिसे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह करीब 10.35 बजे AIIMS बिलासपुर के हेलीपैड पर पहुंचीं। वहां उनका स्वागत किया गया और इसके बाद वह सीधे दीक्षा समारोह के लिए रवाना हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक चित्र के साथ हुई, जिसमें राष्ट्रपति, अतिथियों, संस्थान के अधिकारियों और डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों ने हिस्सा लिया।
समारोह का माहौल औपचारिक होने के साथ-साथ भारतीय परंपरा से भी जुड़ा हुआ दिखाई दिया। AIIMS प्रशासन ने महिला और पुरुष दोनों विद्यार्थियों के लिए कुर्ता-पायजामा और टोपी का ड्रेस कोड निर्धारित किया था। इसी पारंपरिक परिधान में डॉक्टरों ने मंच पर पहुंचकर अपनी डिग्रियां प्राप्त कीं।
समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता और मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू भी मौजूद रहे। इसके अलावा प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता, प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग और विद्यार्थियों के परिवारजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
बैच 2020 के 89 डॉक्टरों के लिए यह दिन लंबे शैक्षणिक सफर के बाद उपलब्धि का अवसर रहा। कठिन मेडिकल पढ़ाई, प्रशिक्षण और लगातार अभ्यास के बाद विद्यार्थियों को राष्ट्रपति के हाथों डिग्री मिलना उनके लिए खास क्षण रहा। समारोह में पांच गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
AIIMS बिलासपुर का पहला दीक्षा समारोह इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह संस्थान की शैक्षणिक यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यहां से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले डॉक्टर आने वाले समय में देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे।
दीक्षा समारोह केवल डिग्री देने का कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि यह विद्यार्थियों के छात्र जीवन से पेशेवर जिम्मेदारी की ओर बढ़ने का प्रतीक भी माना जाता है। चिकित्सा क्षेत्र में यह जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि डॉक्टर सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े होते हैं।
समारोह में विद्यार्थियों को चिकित्सा सेवा के साथ संवेदनशीलता, नैतिकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना बनाए रखने का संदेश भी दिया गया। AIIMS जैसे संस्थानों से निकलने वाले डॉक्टरों से अपेक्षा रहती है कि वे केवल विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं ही न दें, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग तक भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने में योगदान करें।
AIIMS बिलासपुर की स्थापना से हिमाचल प्रदेश सहित आसपास के क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है। संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ चिकित्सा शिक्षा और शोध को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में पहले बैच के विद्यार्थियों का पास होकर निकलना संस्थान की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रपति की मौजूदगी ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया। विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए यह अवसर यादगार रहा। डिग्री और गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्रों के चेहरे पर उत्साह और गर्व दिखाई दिया।
समारोह के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए हेलीपैड से लेकर AIIMS परिसर तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश को नियंत्रित रखा गया और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पूरा आयोजन संपन्न कराया गया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी भी कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण रही। AIIMS देश की प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाओं में शामिल हैं और इनके विस्तार के जरिए केंद्र सरकार चिकित्सा शिक्षा और उच्चस्तरीय इलाज की सुविधाओं को विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने पर जोर देती रही है।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भी समारोह में हिस्सा लेकर विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। प्रदेश के लिए AIIMS बिलासपुर स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।
पहले दीक्षा समारोह ने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा को औपचारिक रूप से नई पहचान दी है। बैच 2020 के 89 डॉक्टर अब डिग्री प्राप्त करने के बाद अपने पेशेवर जीवन की नई शुरुआत करेंगे।
पांच गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों का सम्मान पूरे बैच के लिए प्रेरणा का क्षण रहा। मेडिकल शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन विद्यार्थियों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना उनके लिए विशेष उपलब्धि रही।
AIIMS प्रशासन की ओर से पारंपरिक भारतीय परिधान को ड्रेस कोड के रूप में अपनाना भी समारोह का आकर्षण रहा। महिला और पुरुष विद्यार्थियों ने एक समान कुर्ता-पायजामा और टोपी पहनकर डिग्री ली, जिससे समारोह में भारतीय सांस्कृतिक पहचान भी दिखाई दी।
कुल मिलाकर AIIMS बिलासपुर का पहला दीक्षा समारोह संस्थान, विद्यार्थियों और प्रदेश के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति और 89 डॉक्टरों को मिली डिग्री के साथ संस्थान ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया।





