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कोटरोपी भूस्खलन क्षेत्र में फिर खतरे की आशंका, IIT मंडी अध्ययन में अस्थिर ढलान का खुलासा

हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पद्धर उपमंडल स्थित कोटरोपी भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र को लेकर एक बार फिर खतरे की स्थिति सामने आई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी के वैज्ञानिकों के हालिया शोध में इस क्षेत्र की ढलान को अत्यधिक अस्थिर बताया गया है, जिससे भारी बारिश के दौरान फिर से बड़े भूस्खलन की आशंका जताई गई है।
अध्ययन के अनुसार कोटरोपी क्षेत्र का दाहिना हिस्सा अब पूरी तरह अस्थिर हो चुका है और उसकी संरचनात्मक मजबूती कमजोर पड़ गई है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लगातार वर्षा की स्थिति में यहां फिर से भूस्खलन की घटना हो सकती है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
इस शोध में क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, मिट्टी और चट्टानों की मजबूती का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसके लिए विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया, जिसमें यूएवी (ड्रोन) मैपिंग, उपग्रह इमेजरी (टैनडेम-एक्स) और कंप्यूटर आधारित सिमुलेशन शामिल रहे। इन तकनीकों के माध्यम से पूरे इलाके की विस्तृत संरचना का अध्ययन किया गया।
वैज्ञानिकों ने पहाड़ी ढलान का बारीकी से विश्लेषण करने के लिए सात अलग-अलग प्रोफाइल तैयार किए। इन प्रोफाइल के आधार पर यह पाया गया कि पूरे क्षेत्र का सुरक्षा गुणांक (फैक्टर ऑफ सेफ्टी) एक से नीचे गिर चुका है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर मानी जाती है क्योंकि इसका अर्थ है कि ढलान प्राकृतिक रूप से स्थिर नहीं रह गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा गुणांक का एक से नीचे जाना इस बात का संकेत है कि पूरी पहाड़ी आंतरिक रूप से कमजोर हो चुकी है और किसी भी समय भारी बारिश या कंपन के कारण भूस्खलन हो सकता है।
स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इस अध्ययन के निष्कर्षों से अवगत करा दिया गया है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इस क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई जाए और आवश्यक होने पर यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा जाए।
कोटरोपी क्षेत्र पहले भी बड़े भूस्खलन की घटनाओं का गवाह रहा है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबी अवधि तक यातायात बाधित हुआ था। ऐसे में नए अध्ययन ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।
फिलहाल विशेषज्ञ लगातार निगरानी और अतिरिक्त अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित आपदा से समय रहते निपटा जा सके।





