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हिमाचल प्रदेश
Lahaul में किसानों ने फसल के लिए लिया ग्लेशियर तोड़ने का जोखिम
Ratna Netam
28 April 2026 6:38 PM IST

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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: लाहौल के ग्रामीणों ने हाल ही में अपनी फसलों को बर्बादी से बचाने के लिए एक साहसिक कदम उठाया और पास के ग्लेशियर को काटने का निर्णय लिया। यह अनोखा उपाय ग्रामीणों द्वारा किए गए आपातकालीन कदम के रूप में सामने आया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञ भी चिंतित हैं।
स्थानीय किसानों ने बताया कि लगातार गर्म मौसम और ग्लेशियर से पिघलती बर्फ की अनियमित प्रवाह ने उनके खेतों में पानी की कमी पैदा कर दी थी। इस स्थिति में फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई थी, और ग्रामीणों ने फसल को बचाने के लिए ग्लेशियर की बर्फ को काटकर पानी का प्रवाह नियंत्रित करने का जोखिम उठाया।
किसानों का कहना है कि यह कदम उनके लिए मजबूरी थी। उन्होंने कहा, “हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। अगर हमने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो हमारी फसल पूरी तरह से नष्ट हो जाती। यह हमारी जीविका का स्रोत है।”
ग्राम पंचायत के अध्यक्ष ने बताया कि ग्रामीणों ने अपने सामूहिक प्रयास से बर्फ और ग्लेशियर की एक छोटी परत को काटा, जिससे पानी सीधे खेतों तक पहुंच सके। इस प्रक्रिया में कई ग्रामीण सक्रिय रूप से शामिल हुए और उन्होंने सुरक्षा उपायों का ध्यान रखते हुए काम किया।
हालांकि, पर्यावरणविद और हिमालयन ग्लेशियर विशेषज्ञ इस कदम को खतरे के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि ग्लेशियरों को काटने से स्थानीय पारिस्थितिकी और जल संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वे प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि इस तरह के कदमों को नियंत्रित करने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किया जाए।
स्थानीय प्रशासन ने कहा कि वे इस घटना की जांच करेंगे और भविष्य में आपातकालीन परिस्थितियों में किसानों को वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने के उपाय करेंगे। प्रशासन ने यह भी कहा कि ग्लेशियर काटने जैसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर पर्यावरण का संवेदनशील हिस्सा हैं और उनके नुकसान से आपदा जैसे पानी की कमी, बाढ़ और भूमि क्षरण जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए ग्रामीणों के उपाय को समझते हुए, भविष्य में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ समाधान ढूंढना जरूरी है।
इस घटना ने लाहौल के ग्रामीणों की जीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता को भी उजागर किया है। ग्रामीणों का कहना है कि जलसंकट के समय में उनका प्राथमिक उद्देश्य फसल और जीवनयापन को सुरक्षित रखना था।
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