हिमाचल प्रदेश

Himalayas में भूकंपीय खतरे पर विशेषज्ञों की चिंता

Ratna Netam
14 April 2026 2:43 PM IST
Himalayas में भूकंपीय खतरे पर विशेषज्ञों की चिंता
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमालयी क्षेत्रों में भूकंपीय जोखिम को लेकर विशेषज्ञों ने एक बार फिर चेतावनी जारी की है। वर्ष 1905 में आए विनाशकारी कांगड़ा भूकंप (1905 Kangra Earthquake) का हवाला देते हुए वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने कहा है कि हिमालय क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए मजबूत और वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित योजना बनाना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है, जहां समय-समय पर बड़े भूकंप आने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में अनियोजित निर्माण और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं।
1905 Kangra Earthquake को भारत के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक माना जाता है, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी और व्यापक स्तर पर तबाही हुई थी। इसी घटना को याद करते हुए विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतिहास से सीख लेना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को कम किया जा सके।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी राज्यों में भवन निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू होने चाहिए और सभी नए निर्माण भूकंप-रोधी तकनीक पर आधारित होने चाहिए। साथ ही, पुराने और कमजोर ढांचों की समय-समय पर जांच भी आवश्यक है।
वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि हिमालय क्षेत्र में शहरीकरण को नियंत्रित तरीके से बढ़ाया जाए और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाएं तैयार की जाएं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और स्थानीय लोगों को आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। इससे किसी भी आपात स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।
सरकारी एजेंसियों से भी अपील की गई है कि वे विकास परियोजनाओं में भूगर्भीय अध्ययन को अनिवार्य करें और जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण पर सख्त निगरानी रखें।
1905 Kangra Earthquake की याद दिलाते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही योजना और तैयारी से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल, हिमालय क्षेत्र में बढ़ते निर्माण और पर्यावरणीय दबाव के बीच विशेषज्ञों की यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई जा रही है।
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