- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- मीडिया की साख बचाने के...
मीडिया की साख बचाने के लिए तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर: केजी सुरेश

हमीरपुर: शिक्षा महाकुंभ में वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद केजी सुरेश ने कहा कि आज मीडिया विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहा है। एक समय था, जब अखबार में प्रकाशित खबर को सच मान लिया जाता था, लेकिन आज लोग सवाल पूछते हैं कि अखबार में यह खबर क्यों प्रकाशित की गई। उन्होंने कहा कि मीडिया की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि तथ्यों को सही संदर्भ के साथ प्रस्तुत करना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है।
केजी सुरेश ने कहा कि पहले मीडिया की टैगलाइन होती थी कि हम सच दिखाते हैं, लेकिन सत्य की परिभाषा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। इसके बावजूद पत्रकारिता में तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोगों की आखिरी उम्मीद मीडिया से होती है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया में हर विषय को लेकर अलग-अलग आख्यान और नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आने से यह चुनौती और बढ़ गई है। डीपफेक जैसी तकनीकों के माध्यम से भ्रामक सामग्री तैयार की जा रही है। दूसरी ओर, सूचनाओं की बाढ़ के बीच सत्य कहीं पीछे छूटता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर रील और कंटेंट की भरमार है, जहां एक सामग्री छूट जाने पर दूसरी सामग्री तुरंत सामने आ जाती है। ऐसे माहौल में सही और विश्वसनीय सूचना की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में स्वास्थ्य से जुड़े अनेक तरह के दावे और सूचनाएं सामने आई थीं। आज भी लोगों तक कई बार अधूरी जानकारी पहुंचती है। एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच जमीनी हकीकत और धरातल की सूचनाओं का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी तथ्य को प्रस्तुत करते समय उसका संदर्भ बताना बेहद जरूरी है, क्योंकि संदर्भ के अभाव में सही बात का अर्थ भी बदल सकता है।
केजी सुरेश ने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में स्मृति और श्रुति के माध्यम से ज्ञान और विचार पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों तक पहुंचे हैं। महान व्यक्तित्वों की गाथाएं भी कहानियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाई गईं। आज भी विज्ञापन और जनसंपर्क के क्षेत्र में कहानी कहने की कला के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की जा रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले 80 वर्षों से देश में समस्या आधारित पत्रकारिता का प्रभाव रहा है, लेकिन अब पत्रकारिता को समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इसी संदर्भ में 'लोकल फॉर वोकल' जैसी अवधारणाओं का महत्व बढ़ा है। आज स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि अब समाचार की परिभाषा पर नए सिरे से विचार करने का समय है। पत्रकारिता को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनना चाहिए। लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन का अधिकार जनता के पास है और यह जिम्मेदारी सोशल मीडिया नहीं निभा सकता।
केजी सुरेश ने कहा कि जिस प्रकार लोकतंत्र के लिए सशक्त नागरिक आवश्यक है, उसी प्रकार मीडिया के लिए जागरूक, सजग और ईमानदार पाठक भी जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना के प्रसार और मीडिया की भागीदारी को अधिक लोकतांत्रिक बनाया है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी और विश्वसनीयता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान केजी सुरेश ने शिक्षा महाकुंभ में शामिल प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र में भी संवाद किया और उनके सवालों के जवाब दिए।





