- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- सावन व्रत के दौरान जूस...

धर्मशाला। जिला उपभोक्ता आयोग ने खराब जूस बेचने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने डाबर इंडिया लिमिटेड को शिकायतकर्ता को 60 हजार रुपये मुआवजा देने के साथ ही 10 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा कंपनी को कांगड़ा जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में 30 हजार रुपये जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मामला उस समय सामने आया था, जब शिकायतकर्ता ने सावन के धार्मिक व्रत के दौरान जूस का सेवन किया था। आरोप था कि खरीदा गया जूस खराब था, जिसके कारण उनका व्रत टूट गया। शिकायतकर्ता ने इसे धार्मिक भावनाओं और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद कंपनी को सेवा में कमी और खराब उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार माना। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपभोक्ता को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना कंपनी की जिम्मेदारी है। किसी भी खराब या अनुचित गुणवत्ता वाले उत्पाद से ग्राहक को परेशानी होती है तो उसकी भरपाई करना जरूरी है।
आयोग ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर कंपनी को निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान होने तक 60 हजार रुपये की राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि सावन का व्रत धार्मिक आस्था से जुड़ा था। खराब जूस के कारण व्रत टूटने से उन्हें मानसिक परेशानी और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। इसी आधार पर उन्होंने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की मांग की थी।
उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए कंपनी को जिम्मेदार ठहराया। आयोग का यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा।
डाबर इंडिया लिमिटेड देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल है और इसके कई खाद्य एवं पेय उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं। उपभोक्ता आयोग के इस आदेश के बाद कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग मानकों का विशेष ध्यान रखें।
विशेषज्ञों के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण कानून ग्राहकों को खराब उत्पाद या सेवा में कमी के खिलाफ शिकायत करने का अधिकार देता है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता आयोग मुआवजा और अन्य राहत प्रदान कर सकता है।
इस मामले में आयोग का फैसला न सिर्फ शिकायतकर्ता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि अन्य उपभोक्ताओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करता है। खराब उत्पाद मिलने पर ग्राहक संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं और उचित मुआवजे की मांग कर सकते हैं।





