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हिमाचल प्रदेश
कटासानी स्टेडियम का सपना अधूरा, 2007 से निर्माण कार्य अटका
Kiran
23 Oct 2026 12:47 PM IST

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शिमला के बाहरी इलाके कटासानी में इनडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम की आधारशिला रखे जाने के लगभग दो दशक बाद, अब इसके पूरा होने की उम्मीद जगी है। राज्य सरकार ने बचे हुए काम के लिए 6.5 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। हालांकि, इस प्रोजेक्ट पर अब तक लगभग 25 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन इसकी प्लानिंग, इसमें हुई देरी और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे और उम्मीद है कि अगले चार से पांच महीनों में यह इमारत बनकर तैयार हो जाएगी। उन्होंने कहा, "इस संबंध में कुछ दिन पहले मेरी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात हुई थी। बजट मंजूर हो गया है और जल्द ही टेंडर निकाले जाएंगे। हमें उम्मीद है कि अगले चार से पांच महीनों में हम इस इमारत का काम पूरा कर लेंगे।" पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 2007 में इस स्टेडियम की आधारशिला रखी थी। तब से अब तक चार सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन यह प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है। मौके पर एक जर्जर बहुमंजिला ढांचा खड़ा है।
इस प्रोजेक्ट के दायरे (स्कोप) में कई बार बदलाव किए गए हैं। शुरुआत में इसे क्रिकेट स्टेडियम के रूप में सोचा गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर इसमें 400 मीटर का एथलेटिक्स ट्रैक और इनडोर स्पोर्ट्स सुविधा जोड़ने का फैसला लिया गया। बाद में, खेल विभाग और इसे बनाने वाली एजेंसी (PWD) ने पाया कि खराब प्लानिंग के कारण एथलेटिक्स ट्रैक बनाना संभव नहीं है, इसलिए इस प्रस्ताव को हटा दिया गया। इसी तरह, एक शूटिंग रेंज बनाने का प्रस्ताव भी पूरा नहीं हो सका।
अब सरकार इस परिसर में एक अकादमी चलाने के लिए किसी पेशेवर स्पोर्ट्स एजेंसी को शामिल करने पर विचार कर रही है। सिंह ने बताया कि उन्होंने खेल मंत्री के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। इसके तहत एक मल्टी-स्पोर्ट्स अकादमी बनाने की योजना है, जहां वॉलीबॉल, बॉक्सिंग और कबड्डी जैसे खेलों की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि यह अकादमी पेशेवर तरीके से चले और यहां अच्छे कोच हों। शिमला और उसके आसपास अच्छी स्पोर्ट्स सुविधाएं लगभग न के बराबर हैं। शहर में मौजूद इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की हालत भी ठीक नहीं है। हम शिमला के पास एक बेहतरीन स्पोर्ट्स सुविधा विकसित करना चाहते हैं, जहां खेल प्रेमी जाकर खेल सकें।"
हालांकि, फंडिंग की इस नई घोषणा के बावजूद खेल प्रेमियों के मन में बना संदेह अभी भी दूर नहीं हुआ है। खेल विभाग के सेवानिवृत्त उप निदेशक सुबोध रमौल ने कहा कि PWD के पास खेल बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए जरूरी विशेष विशेषज्ञता की कमी है। उन्होंने मौजूदा ढांचे में तकनीकी कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि बचे हुए काम की देखरेख खेल सुविधाओं के निर्माण का अनुभव रखने वाले किसी प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट द्वारा की जानी चाहिए। खेल प्रेमियों ने भी लंबे विलंब और कथित कुप्रबंधन के लिए जवाबदेही तय न होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि भारी खर्च होने और कई साल बर्बाद हो जाने के बावजूद, किसी की भी जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई?
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