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हिमाचल प्रदेश
हिमाचल में डॉक्टरों ने खोला मोर्चा 40 लाख के जुर्माने पर सवाल
Ratna Netam
11 Oct 2026 8:58 PM IST

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने राज्य सरकार से मेडिकल शिक्षा से जुड़ी नीतियों में बदलाव करने की मांग की है। एसोसिएशन ने रविवार को सरकार से अपील की कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के लिए लागू तीन साल की अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पॉलिसी की समीक्षा की जाए, नियमों का पालन नहीं करने पर निर्धारित 40 लाख रुपये के जुर्माने को कम किया जाए और पीजी मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण अच्छे रैंक वाले मेडिकल अभ्यर्थी हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने से बच सकते हैं।
रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मेजर बिरसुखमन सिंह और अन्य पदाधिकारियों ने राज्य में मेडिकल शिक्षा की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक अनिवार्य सेवा की शर्त, भारी आर्थिक जुर्माना और अपेक्षाकृत कम स्टाइपेंड मेडिकल छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और ऐसी नीति बनाने की अपील की है, जिससे हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेज प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करने के साथ उन्हें राज्य में बनाए रखने में सक्षम हो सकें।
तीन साल के अनिवार्य सर्विस बॉन्ड में बदलाव की मांग
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश में लागू तीन साल की अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं।एसोसिएशन के अनुसार, मेडिकल छात्रों के लिए निर्धारित लंबी सेवा अवधि उनके भविष्य के पेशेवर विकल्पों को प्रभावित कर सकती है।संगठन ने राज्य सरकार से इस नीति की समीक्षा करने और इसमें आवश्यक बदलाव करने की मांग की है।आरडीए का कहना है कि मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी प्रवेश लेने से पहले संबंधित कॉलेज की शैक्षणिक सुविधाओं के साथ सेवा संबंधी शर्तों और आर्थिक दायित्वों पर भी विचार करते हैं।ऐसी स्थिति में तीन साल की अनिवार्य सेवा का प्रावधान कुछ उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय का विषय बन सकता है।एसोसिएशन ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए, जिससे मेडिकल छात्रों के हितों और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
40 लाख रुपये के जुर्माने पर जताई चिंता
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सर्विस बॉन्ड की शर्तों का पालन नहीं करने पर निर्धारित 40 लाख रुपये के जुर्माने को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।संगठन का कहना है कि इतनी बड़ी आर्थिक देनदारी मेडिकल छात्रों के लिए गंभीर विषय है।आरडीए ने राज्य सरकार से जुर्माने की राशि कम करने की मांग की हैएसोसिएशन के मुताबिक, लंबी अनिवार्य सेवा अवधि और भारी जुर्माने का संयुक्त प्रभाव मेडिकल अभ्यर्थियों के निर्णय पर पड़ सकता है।विशेष रूप से वे उम्मीदवार, जिनके पास विभिन्न राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के विकल्प उपलब्ध होते हैं, प्रवेश लेने से पहले इन शर्तों की तुलना कर सकते हैं।संगठन ने आशंका जताई कि मौजूदा नियमों के कारण अच्छी रैंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को प्राथमिकता देने से बच सकते हैं।हालांकि, एसोसिएशन ने उपलब्ध बयान में जुर्माने की प्रस्तावित नई राशि का उल्लेख नहीं किया है।
पीजी मेडिकल स्टाइपेंड बढ़ाने की अपील
आरडीए ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों को मिलने वाले स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग भी उठाई है।संगठन के अध्यक्ष मेजर बिरसुखमन सिंह और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पीजी मेडिकल छात्रों को मिलने वाला स्टाइपेंड देश के सबसे कम स्टाइपेंड में से एक माना जाता है।एसोसिएशन ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाने की अपील की है।संगठन का कहना है कि मेडिकल छात्रों के लिए आर्थिक सहायता और सेवा संबंधी शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं।पीजी मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में स्टाइपेंड उनके आर्थिक प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।आरडीए के अनुसार, अपेक्षाकृत कम स्टाइपेंड और लंबी अनिवार्य सेवा अवधि जैसी शर्तें मेडिकल छात्रों के लिए हिमाचल प्रदेश में प्रवेश लेने के फैसले को प्रभावित कर सकती हैं।हालांकि, उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति के विवरण में वर्तमान स्टाइपेंड की सटीक राशि या एसोसिएशन की ओर से मांगी गई नई राशि का उल्लेख नहीं किया गया है।
NEET-PG काउंसलिंग पर असर पड़ने की आशंका
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा नीतियों का असर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातकोत्तर यानी NEET-PG की काउंसलिंग प्रक्रिया में देखने को मिल सकता है।संगठन के मुताबिक, अच्छी रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवार विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध अवसरों और प्रवेश संबंधी शर्तों की तुलना करते हैं।यदि किसी राज्य में अनिवार्य सेवा अवधि अधिक हो, नियमों का पालन नहीं करने पर भारी आर्थिक जुर्माना हो और स्टाइपेंड अपेक्षाकृत कम मिले, तो उम्मीदवार दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।आरडीए ने आशंका जताई कि इन कारणों से हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को आकर्षित करने में कठिनाई हो सकती है।हालांकि, संगठन की यह चिंता संभावित प्रभाव से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या या प्रवेश संबंधी आंकड़े नहीं दिए गए हैं, जिन्होंने इन शर्तों के कारण हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को नहीं चुना।
प्रतिभाशाली मेडिकल छात्रों को बनाए रखने की चुनौती
एसोसिएशन ने केवल नए उम्मीदवारों को आकर्षित करने ही नहीं, बल्कि योग्य मेडिकल स्नातकों को राज्य में बनाए रखने की क्षमता को लेकर भी चिंता व्यक्त की हैसंगठन का कहना है कि मेडिकल शिक्षा से जुड़ी नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जो छात्रों को बेहतर शैक्षणिक और पेशेवर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हों।आरडीए के अनुसार, मौजूदा सेवा बॉन्ड की अवधि, जुर्माने की राशि और स्टाइपेंड से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा आवश्यक है।संगठन ने संकेत दिया कि यदि इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो राज्य के मेडिकल संस्थानों के प्रति अच्छे रैंक वाले उम्मीदवारों की रुचि प्रभावित हो सकती है।मेडिकल कॉलेजों में योग्य अभ्यर्थियों का प्रवेश और प्रशिक्षण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एसोसिएशन ने राज्य सरकार से नीति में सुधार पर विचार करने का आग्रह किया है।
राज्य सरकार से नीति की समीक्षा करने की अपील
रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरडीए अध्यक्ष मेजर बिरसुखमन सिंह और अन्य पदाधिकारियों ने राज्य सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।इनमें तीन साल की अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पॉलिसी में बदलाव, 40 लाख रुपये के जुर्माने में कमी और पोस्टग्रेजुएट मेडिकल स्टाइपेंड में बढ़ोतरी शामिल हैं।एसोसिएशन का कहना है कि इन मुद्दों पर समय रहते ध्यान देने से राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए परिस्थितियां बेहतर बनाई जा सकती हैं।संगठन ने सरकार से मेडिकल छात्रों की चिंताओं को समझने और मौजूदा नियमों की समीक्षा करने की अपील की है।फिलहाल उपलब्ध जानकारी में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
सरकार के फैसले पर टिकी डॉक्टरों की नजर
शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन की मांगों के बाद अब राज्य सरकार के रुख पर नजर रहेगी।संगठन ने स्पष्ट किया है कि लंबे सर्विस बॉन्ड, भारी जुर्माने और कम स्टाइपेंड जैसी परिस्थितियां NEET-PG काउंसलिंग के दौरान उम्मीदवारों के निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं।आरडीए ने राज्य सरकार से इन प्रावधानों में बदलाव की अपील करते हुए मेडिकल छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने पर जोर दिया है।फिलहाल सरकार की ओर से किसी संशोधन की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में तीन साल के सर्विस बॉन्ड, 40 लाख रुपये के जुर्माने और पीजी स्टाइपेंड से जुड़ी मांगों पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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