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शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में मिशन-2027 की तैयारियों के साथ अब टिकट को लेकर उम्र और अनुभव की बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता 75 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और अब भी सक्रिय राजनीति में बने हुए हैं। ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी इन दिग्गजों को फिर मैदान में उतारती है या नई पीढ़ी को मौका देती है, इस पर सबकी नजर है।
कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को चुनावी मोड में लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पार्टी की ओर से जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर तक संगठन को मजबूत करने के साथ ही विभिन्न जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा चल रही है।
हालांकि, पार्टी के कुछ अनुभवी चेहरे अब भी पूरी तरह सक्रिय हैं और चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दे रहे। ऐसे नेताओं के राजनीतिक भविष्य का फैसला अंततः कांग्रेस हाईकमान और पार्टी की चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।
धनीराम शांडिल सबसे वरिष्ठ सक्रिय चेहरों में
कैबिनेट मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल हिमाचल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ सक्रिय नेताओं में शामिल हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, वह 86 वर्ष की उम्र में भी राजनीति में सक्रिय हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बनी हुई है। सोलन विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे शांडिल ने चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान पर छोड़ा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से चुनाव से संन्यास की घोषणा नहीं की है।
शांडिल की सक्रियता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी के सामने उनके क्षेत्र में अगली पीढ़ी के चेहरों को आगे बढ़ाने का सवाल भी है। उनके बेटे संजय शांडिल को कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग में प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। ऐसे में सोलन सीट को लेकर आने वाले समय में संगठन और टिकट से जुड़ी चर्चा और तेज हो सकती है।
कौल सिंह को लेकर तस्वीर थोड़ी अलग
कौल सिंह ठाकुर भी हिमाचल कांग्रेस के लंबे अनुभव वाले नेताओं में रहे हैं। उन्होंने कई बार विधायक और मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक स्थिति में उनके मामले को धनीराम शांडिल और अन्य सक्रिय वरिष्ठ नेताओं के साथ सीधे जोड़ना सही नहीं होगा।
जुलाई 2026 में कौल सिंह ठाकुर के चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की खबर सामने आई थी। इसके बाद हिमाचल कांग्रेस में पीढ़ी परिवर्तन और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हुई थी।
इसलिए 2027 के टिकट समीकरण में कौल सिंह का नाम अनुभव बनाम उम्र की बहस को समझने के लिए महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उनकी ओर से चुनावी संन्यास की घोषणा की खबर पहले ही सामने आ चुकी है। ऐसे में अंतिम रूप से पार्टी की रणनीति और उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजर रहेगी।
ठाकुर सिंह भरमौरी भी चर्चा में
पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी भी वरिष्ठ नेताओं की उस सूची में हैं, जिनके राजनीतिक भविष्य पर 2027 के चुनाव से पहले नजर बनी हुई है। वह वीरभद्र सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने का लंबा अनुभव रखते हैं।
जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, भरमौरी ने भविष्य की चुनावी योजना को लेकर अपने परिवार की राजनीतिक भूमिका का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि अगले चुनाव में उनका बेटा भरमौर से और वह भटियात से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, अंतिम टिकट का फैसला पार्टी ही करेगी।
यही वजह है कि पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ उनके क्षेत्रों में संभावित नए दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ सकती है।
कांग्रेस के सामने पीढ़ी परिवर्तन की चुनौती
हिमाचल कांग्रेस ने मिशन-2027 के तहत संगठन को बूथ, ब्लॉक, पंचायत और गांव स्तर तक मजबूत करने की रणनीति बनाई है। पार्टी का जोर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और संगठन के प्रदर्शन की समीक्षा पर है।
ऐसे में टिकट वितरण के समय उम्र और राजनीतिक अनुभव के बीच संतुलन बनाना पार्टी के लिए अहम मुद्दा हो सकता है। एक तरफ पुराने नेताओं के पास लंबा राजनीतिक अनुभव, स्थानीय पकड़ और संगठनात्मक नेटवर्क है। दूसरी तरफ पार्टी को नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने और भविष्य के नेतृत्व की तैयारी की जरूरत भी है।
उम्र से ज्यादा सक्रियता पर जोर?
हिमाचल कांग्रेस की हालिया संगठनात्मक गतिविधियों से इतना संकेत जरूर मिलता है कि पार्टी नेताओं की सक्रियता और प्रदर्शन को महत्व दे रही है। संगठन सृजन अभियान के तहत पार्टी ने साफ तौर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के कामकाज की समीक्षा शुरू की है।
इसी आधार पर वरिष्ठ नेताओं के मामले में भी केवल उम्र को नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक सक्रियता, क्षेत्र में प्रभाव और संगठन के लिए योगदान को देखा जा सकता है। हालांकि, टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा और अभी किसी भी वरिष्ठ नेता के बारे में अंतिम सूची सामने नहीं आई है।
छह वरिष्ठ नेताओं को लेकर चर्चा
पार्टी के भीतर 75 वर्ष से अधिक उम्र वाले करीब छह वरिष्ठ नेताओं के चुनावी भविष्य को लेकर चर्चा होने की बात सामने आ रही है। इनमें धनीराम शांडिल और ठाकुर सिंह भरमौरी जैसे सक्रिय चेहरे शामिल हैं, जबकि कौल सिंह ठाकुर का मामला उनके चुनावी संन्यास की घोषणा के कारण अलग स्थिति में है।
इसके अलावा कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और पिछले चुनावी प्रदर्शन को भी पार्टी स्तर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती यह होगी कि अनुभवी चेहरों की उपयोगिता बनाए रखते हुए संगठन में नई पीढ़ी के लिए पर्याप्त जगह भी तैयार की जाए।
2027 के टिकट का फैसला हाईकमान करेगा
अभी 2027 विधानसभा चुनाव में काफी समय है और कांग्रेस की ओर से टिकट वितरण को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। पार्टी संगठन को मजबूत करने के साथ संभावित उम्मीदवारों के प्रदर्शन और जमीनी सक्रियता को भी परख रही है।
ऐसे में वरिष्ठ नेताओं के टिकट को लेकर जारी चर्चा फिलहाल संभावनाओं तक सीमित है। धनीराम शांडिल जैसे नेता अभी सक्रिय हैं और टिकट का फैसला हाईकमान पर छोड़ चुके हैं। ठाकुर सिंह भरमौरी भी चुनावी राजनीति में अपनी भूमिका को लेकर संकेत दे चुके हैं, जबकि कौल सिंह ठाकुर की ओर से चुनावी संन्यास की बात सामने आ चुकी है।
आने वाले महीनों में कांग्रेस की संगठनात्मक बैठकें, क्षेत्रीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता इस बहस को और दिशा दे सकती है। फिलहाल हिमाचल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 की चुनावी तैयारी में अनुभव को कितना महत्व दिया जाए और नई पीढ़ी को कितनी जगह मिले। उम्र बनाम अनुभव की यह बहस अब टिकट वितरण के करीब आने के साथ और महत्वपूर्ण होने वाली है।





