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Dharamshala: जय राम ठाकुर बोले, सुक्खू सरकार का वित्तीय दुरुपयोग

धर्मशाला: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अपने कांगड़ा प्रवास के पहले दिन शनिवार को ज्वालाजी विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया, जहां उन्होंने सबसे पहले ऐतिहासिक मां ज्वाला जी मंदिर में शीश नवाकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और मंगलमय भविष्य की कामना की। मंदिर परिसर पंहुचने पर भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया, जिसके पश्चात उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आगामी सांगठनिक विषयों पर गंभीर चर्चा की। इसके बाद वे प्रसिद्ध लखदाता पीर दंगल मेले में बतौर मुख्य अतिथि सम्मिलित हुए, जहां उन्होंने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसी पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं। आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक कुश्ती को जीवित रखा है, इसके लिए आयोजक बधाई के पात्र हैं।
बाद में मीडिया से रूबरू होते हुए जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें जमकर घेरा।
नेता प्रतिपक्ष ने रिवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) के मुद्दे पर कहा कि मुख्यमंत्री इस गंभीर विषय पर केवल और केवल ओछी राजनीति कर रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने सरकार के भीतर चल रहे अंतर्विरोधों पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ अधिकारी प्रेजेंटेशन के माध्यम से स्वीकार कर रहे हैं कि प्रदेश की तिजोरी खाली है और वे सब्सिडी, कर्मचारियों के देय भत्ते या पेंशन देने की स्थिति में नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री बिना किसी रोडमैप या फार्मूले के 2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के हवाई दावे कर रहे हैं जो पूरी तरह से विरोधाभासी और हास्यास्पद है। मुख्यमंत्री के 'मित्रों' की सुख-सुविधाओं के लिए धन लुटाया जा रहा है, जबकि आम जनता अपने जायज कामों के लिए भटक रही है।
जयराम ठाकुर ने राज्य की आर्थिकी को लेकर भाजपा उतनी ही चिंतित है जितनी सरकार होनी चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री ने केंद्र के साथ सही ढंग से संवाद स्थापित करने के बजाय केवल राजनीतिक द्वेष के चलते संबंध खराब किए हैं। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश में केंद्र की 191 महत्वपूर्ण योजनाएं 90:10 के अनुपात में चल रही हैं और राज्य को हजारों करोड़ की वित्तीय मदद केंद्र से ही प्राप्त होती है। यदि मुख्यमंत्री राजनीति छोड़कर राज्य की भलाई के लिए सकारात्मक कदम उठाते हैं तो विपक्ष सहयोग के लिए तैयार है, अन्यथा केंद्र को गाली देने और विपक्ष को कोसने से हिमाचल का भला होने वाला नहीं है।





