हिमाचल प्रदेश

Dharamshala: भगवान श्रीकृष्ण से विवाह कर जीवनसाथी बनाने का निर्णय, यमुनानगर की युवती

Admindelhi1
11 March 2026 12:35 AM IST
Dharamshala: भगवान श्रीकृष्ण से विवाह कर जीवनसाथी बनाने का निर्णय, यमुनानगर की युवती
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धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना के तहत स्थानीय स्तर पर विशेष अभियान शुरू किया है। भारत में भूकंप के खतरों का निर्धारण और लचीलापन बढ़ाना शीर्षक वाली यह पांच वर्षीय परियोजना वर्ष 2030 तक चलेगी। इसे भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और यूके के नेचुरल एनवायरनमेंट रिसर्च काउंसिल द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है। इस उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम में यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज, एस्टन बिजनेस स्कूल (यूके), एस्टन यूनिवर्सिटी, लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी, आईईएसईआर कोलकाता, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय और नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

इस शोध परियोजना के दो मुख्य वैज्ञानिक और सामाजिक पहलू हैं। पहले चरण में वैज्ञानिक पृथ्वी की ऊपरी परत में सक्रिय फॉल्ट लाइनों की पहचान और मानचित्रण कर रहे हैं, जो भविष्य में भूकंप का कारण बन सकती हैं। इसके लिए हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में अत्याधुनिक 'सीस्मोमीटर' तैनात किए जा रहे हैं ताकि जमीनी हलचलों का सटीक डेटा जुटाया जा सके। परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा सामुदायिक लचीलेपन और जोखिम संचार पर केंद्रित है, जिसके तहत यह अध्ययन किया जा रहा है कि स्थानीय समुदायों तक भूकंप की जानकारी किस तरह पंहुचती है और बचाव की तैयारियों में कौन सी बाधाएं आड़े आती हैं।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज के अधिष्ठाता और परियोजना के सह-अन्वेषक प्रोफेसर दीपक पंत, यूके के एस्टन बिजनेस स्कूल के डॉ. कोमल राज अर्याल के साथ मिलकर इस सामाजिक विज्ञान घटक का नेतृत्व कर रहे हैं।

इस अभियान का एक मुख्य लक्ष्य 1905 के विनाशकारी कांगड़ा भूकंप जैसे ऐतिहासिक उदाहरणों के माध्यम से लोगों को जागरूक करना और उन्हें भविष्य की आपदाओं के लिए मानसिक एवं तकनीकी रूप से तैयार करना है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के एमएससी पर्यावरण विज्ञान के छात्र, अभय और राघव राणा, कांगड़ा और हमीरपुर के दुर्गम क्षेत्रों में फील्ड सर्वे कर डेटा एकत्र कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. पी. बंसल के मार्गदर्शन में संचालित यह पहल हिमालयी क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और सामुदायिक सुरक्षा के समन्वय की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

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