हिमाचल प्रदेश

Dharamshala: ऐतिहासिक ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की अपील

Admindelhi1
24 March 2026 2:18 AM IST
Dharamshala: ऐतिहासिक ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की अपील
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धर्मशाला: हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि इतिहास लेखन की भारतीय दृष्टि और शैली अलग है। इस दृष्टि और शैली से अनभिज्ञता के कारण पश्चिमी इतिहासकार यह मान बैठते हैं कि भारत में इतिहास लेखन की कोई परम्परा नहीं रही है। यह मान्यता वास्तविकता से कोसों दूर है। इतिहास लेखन की भारतीय शैली में तथ्यों को नीरस के बजाय आलंकारिक और सरस शैली में प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए नीलमत पुराण और राजतंरगिणी जैसे ग्रंथों को पढ़ते समय इतिहास लेखन की भारतीय शैली से परिचय जरूरी हो जाता है, तभी सटीक निष्कर्षों पर पहुंचा जा सकता है। प्रो. अग्निहोत्री ने यह विचार सोमवार को हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कश्मीर अध्ययन केन्द्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘पुरातन कश्मीर का सर्वांगिक विश्लेषण : नीलमत पुराण और राजतरंगिणी की दृष्टि में‘ विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे।

प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि नीलमत पुराण और राजतंरिगिणी जैसे ग्रंथों को इतिहास के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित करना चाहिए। यदि अन्य स्त्रोंतों को भी सामने रखकर इनको पढ़ा-पढ़ाया जाता है तो संतुलित निष्कर्षों तक पहुंचने की संभावना अधिक रहती है।

इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर अध्ययन केन्द्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने अपने वक्तव्य में कहा कि राजतरंगिणी और नीलमत पुराण वृहत्तर परम्परा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इसलिए इन ग्रंथों को समझने के लिए उस पूरी परम्परा को भी समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि ये ग्रंथ आज की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं तो इनका अध्ययन एक समकालीन ग्रंथ की तरह होना चाहिए।

समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. चंद्रदीप सिंह ने सभी सहभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस विषय पर संगोष्ठी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने आशा जताई कि इस संगोष्ठी से निकले निष्कर्ष अकादमिक जगत के अन्य लोग भी प्रेरित होंगे।

कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. मलकीत सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि यह संगोष्ठी जम्मू-कश्मीर के इतिहास को एक व्यापक फलक पर समझने का प्रयास है। यह चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य प्रदान करने के लिए आवश्यक है।

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