हिमाचल प्रदेश

Dharampur: धर्माणी ने नलवाड़ और देवता मेले की शुरुआत की

Payal
6 April 2026 4:02 PM IST
Dharampur: धर्माणी ने नलवाड़ और देवता मेले की शुरुआत की
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: Dharmani ने Dharampur में छः दिवसीय नलवाड़ और देवता मेला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर स्थानीय लोग, श्रद्धालु और पर्यटक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मेले का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक उत्सवों के साथ किया गया है।
मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, कला और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करता है। धर्माणी ने उद्घाटन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे मेले स्थानीय समुदाय को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने में मदद करते हैं।
धर्माणी ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय त्योहारों और मेलों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता दे रही है। उन्होंने मेले में सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिरों और देवस्थानियों के पास साफ-सफाई, जल और स्वास्थ्य सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। साथ ही, पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने मेले की शुरूआत पर खुशी व्यक्त की। उनका कहना है कि मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ होता है। मेले के दौरान स्थानीय हस्तशिल्प, खाने-पीने की वस्तुएं और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक मेले स्थानीय पहचान बनाए रखने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। मेले में भागीदारी से न केवल आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी में सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और जागरूकता भी आती है।
धर्माणी ने समारोह में यह भी आश्वासन दिया कि आने वाले वर्षों में ऐसे मेलों और उत्सवों के लिए और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की, ताकि मेले का आयोजन सुव्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से हो।
कुल मिलाकर, धरमपुर में धर्माणी द्वारा छः दिवसीय नलवाड़ और देवता मेले का उद्घाटन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय, व्यापार और पर्यटन के लिए भी एक सकारात्मक पहल साबित हो रही है। यह मेला हिमाचल प्रदेश की परंपरा और संस्कृति को बनाए रखने और बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है।
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