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फल की रेहड़ी लगाने वाले पिता की बेटी ने पास की NEET परीक्षा

सोलन। मेहनत, लगन और मजबूत इच्छाशक्ति के आगे आर्थिक परेशानियां कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। इसे साबित कर दिखाया है सोलन के पुराना बस स्टैंड पर फल की रेहड़ी लगाने वाले राकेश शर्मा की बेटी कनिका शर्मा ने। सीमित संसाधनों के बावजूद कनिका ने कड़ी मेहनत कर NEET परीक्षा पास की और अपने परिवार के साथ-साथ पूरे सोलन जिले का नाम रोशन किया है।
कनिका की सफलता की खबर सामने आने के बाद सोलन में खुशी का माहौल है। लोगों ने उनकी उपलब्धि को मेहनत और संघर्ष की मिसाल बताया है। खास बात यह है कि कनिका ने यह सफलता ऐसे परिवार से निकलकर हासिल की है, जहां संसाधन सीमित थे, लेकिन सपने बड़े थे।
कनिका ने अपनी प्लस टू की पढ़ाई गवर्नमेंट सेकेंडरी स्कूल झगड़ियानी, हमीरपुर से पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया और इसके लिए लगातार मेहनत करती रहीं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दी और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।
कनिका के पिता राकेश शर्मा पुराना बस स्टैंड पर फल की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष के बल पर बेटी की पढ़ाई जारी रखी। बेटी की सफलता ने उनके वर्षों के परिश्रम को एक बड़ी खुशी में बदल दिया है।
बुधवार को समाजसेवी और व्यापार मंडल सोलन के पूर्व अध्यक्ष मुकेश गुप्ता अपने व्यापारी साथियों के साथ पुराना बस स्टैंड पहुंचे। उन्होंने राकेश शर्मा को बेटी कनिका की सफलता पर बधाई दी और उनका मुंह मीठा करवाया।
इस दौरान उन्होंने कनिका की उपलब्धि को पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि प्रतिभा और मेहनत के सामने आर्थिक परिस्थितियां कभी आड़े नहीं आतीं।
खुशी के इस मौके पर मुकेश गुप्ता ने उसी रेहड़ी से फल खरीदे, जहां राकेश शर्मा रोजाना मेहनत करते हैं। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों और व्यापारियों के बीच फल वितरित किए।
व्यापारियों ने भी राकेश शर्मा की मेहनत और बेटी की उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक पिता का संघर्ष और बेटी की मेहनत मिलकर ऐसी सफलता की कहानी लिखते हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है।
स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि कनिका की सफलता उन सभी माता-पिता के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार का सहयोग और बच्चों की मेहनत मिलकर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती है।
कनिका की सफलता ने यह संदेश दिया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है।
राकेश शर्मा के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला है। जिस बेटी की शिक्षा के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की, आज उसी बेटी ने अपनी उपलब्धि से परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
कनिका की सफलता के बाद क्षेत्र के लोगों में भी उत्साह है। कई लोग अब उनकी कहानी को युवाओं के लिए प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि छोटे शहरों और सामान्य परिवारों से निकलने वाले युवा भी अपनी मेहनत के दम पर बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं।
NEET परीक्षा पास करने के बाद कनिका अब मेडिकल शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। परिवार और शुभचिंतकों को उम्मीद है कि वह आने वाले समय में अपनी मेहनत से और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी।
कनिका शर्मा की कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, विश्वास और मेहनत की जीत की कहानी है। उनके पिता की मेहनत और बेटी की लगन ने यह साबित कर दिया कि सफलता हासिल करने के लिए सबसे जरूरी चीज मजबूत हौसला होता है।





