- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- क्षतिग्रस्त पेयजल...

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में बारिश और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित पेयजल योजनाओं की मरम्मत और बहाली के लिए प्रशासन ने राहत कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन ने फैसला लिया है कि क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं को दोबारा सुचारू करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से प्रत्येक योजना के लिए 2 लाख रुपये की राशि जारी की जाएगी।
शिमला के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) अनुपम कश्यप ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बारिश से प्रभावित पेयजल योजनाओं को जल्द से जल्द बहाल करना प्रशासन की प्राथमिकता है, ताकि लोगों को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े। उन्होंने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे खराब हुई सभी योजनाओं का विवरण तैयार कर आवश्यक प्रस्ताव और संबंधित दस्तावेजों के साथ उनके कार्यालय में जमा करें।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने यह निर्देश जल जीवन मिशन के तहत आयोजित जिला स्तरीय जल एवं स्वच्छता अभियान की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। बैठक में जल शक्ति विभाग के अधिकारियों सहित अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान जिले में पेयजल व्यवस्था, क्षतिग्रस्त योजनाओं की स्थिति और उनकी बहाली को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि राहत राशि केवल उन्हीं पेयजल योजनाओं के लिए स्वीकृत की जाएगी, जिनके नुकसान की रिपोर्ट राजस्व विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से दर्ज की गई होगी। उन्होंने कहा कि आपदा से हुए नुकसान का सही आकलन और रिकॉर्ड तैयार करना बेहद जरूरी है, ताकि राहत कार्यों को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पेयजल योजनाओं को हुए नुकसान की जानकारी समय पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि किसी पेयजल योजना को प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से नुकसान पहुंचता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित पटवारी को दी जानी चाहिए, ताकि नुकसान का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया जा सके और आवश्यक कार्रवाई समय पर शुरू हो सके।
उपायुक्त ने कहा कि समय पर सूचना मिलने से नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने, दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने और राहत राशि जारी करने में देरी नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने और प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को जल्द बहाल करने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। पेयजल योजनाएं भी इससे प्रभावित हुई हैं, जिसके कारण कई स्थानों पर लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ा।
प्रशासन की ओर से लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्य चलाए जा रहे हैं। पेयजल योजनाओं की मरम्मत को प्राथमिकता इसलिए दी जा रही है क्योंकि पानी की आपूर्ति लोगों की मूलभूत जरूरतों से जुड़ी हुई है।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित योजनाओं की शीघ्र बहाली इस लक्ष्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रशासन का कहना है कि क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत के साथ-साथ भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर तैयारी भी की जाएगी।
बैठक के दौरान स्वच्छता अभियान और जल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे जल स्रोतों के संरक्षण और पेयजल योजनाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
उपायुक्त ने कहा कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे योजनाओं की निगरानी नियमित रूप से करें और किसी भी समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।
प्रशासन के इस फैसले से बारिश से प्रभावित पेयजल योजनाओं की मरम्मत में तेजी आने की उम्मीद है। अब जल शक्ति विभाग को क्षतिग्रस्त योजनाओं की सूची और प्रस्ताव तैयार कर प्रशासन को सौंपने होंगे, जिसके बाद पात्र योजनाओं के लिए राहत राशि जारी की जाएगी।
शिमला जिला प्रशासन का कहना है कि आपदा के कारण प्रभावित हुई पेयजल व्यवस्था को सामान्य करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनता को पेयजल से जुड़ी किसी भी परेशानी का लंबे समय तक सामना न करना पड़े और योजनाओं की बहाली में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।





