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हिमाचल में बस संचालन पर विवाद: HRTC और निजी ऑपरेटरों के टैक्स अंतर से उठे सवाल

Himachal हिमाचल : हिमाचल प्रदेश में लग्जरी बसों के संचालन को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य परिवहन निगम (HRTC) और निजी बस ऑपरेटरों के बीच टैक्स और परमिट फीस में बड़े अंतर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस मुद्दे ने परिवहन व्यवस्था और प्रतिस्पर्धा की समानता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, एचआरटीसी शिमला से दिल्ली सहित अन्य राज्यों के लिए जो बस सेवाएं संचालित करता है, उन पर प्रति बस सालाना लगभग 18 लाख रुपये रूट परमिट फीस और अन्य टैक्स के रूप में खर्च आता है। यह खर्च निगम की संचालन लागत को काफी बढ़ा देता है।
इसके विपरीत, निजी लग्जरी बस ऑपरेटर केवल लगभग तीन लाख रुपये सालाना टैक्स जमा करके बसों का संचालन कर रहे हैं। यह बसें शिमला, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लेकर अन्य राज्यों तक चल रही हैं।
केंद्र सरकार द्वारा नियमों में किए गए हालिया बदलाव के तहत निजी बस ऑपरेटरों को एक निश्चित वार्षिक टैक्स जमा करने के बाद किसी भी राज्य में बस चलाने की अनुमति मिल गई है। इस प्रावधान के बाद निजी ऑपरेटरों को संचालन में अधिक स्वतंत्रता मिली है।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर राज्य परिवहन निगम ने चिंता जताई है। एचआरटीसी का कहना है कि टैक्स और फीस में इतना बड़ा अंतर निगम के लिए वित्तीय नुकसान का कारण बन रहा है। साथ ही, निजी बसों के संचालन में किराया और समय की कोई निश्चितता नहीं होने से प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो रही है।
राज्य के शिमला, कुल्लू और मनाली जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में निजी लग्जरी बसों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे सरकारी परिवहन सेवाओं की मांग प्रभावित होने की बात भी सामने आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों क्षेत्रों के लिए नियम समान नहीं बनाए गए तो सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। वहीं, निजी ऑपरेटरों का कहना है कि नई व्यवस्था से यात्रियों को अधिक विकल्प मिल रहे हैं और सेवाओं का विस्तार हुआ है।
फिलहाल यह मुद्दा राज्य में परिवहन नीति और प्रतिस्पर्धा के संतुलन को लेकर बहस का केंद्र बन गया है।





