हिमाचल प्रदेश

SIR पर कांग्रेस की चिंता 13 करोड़ लोगों के वोटिंग अधिकार पर उठाए सवाल

Ratna Netam
9 Oct 2026 4:52 PM IST
SIR पर कांग्रेस की चिंता 13 करोड़ लोगों के वोटिंग अधिकार पर उठाए सवाल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के थियोग से विधायक और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने शुक्रवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चिंता जताते हुए दावा किया कि इस प्रक्रिया से 13 करोड़ से अधिक लोग अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। राठौर ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से संविधान, लोकतंत्र और स्वतंत्र संस्थाओं की स्थिति को लेकर सवाल उठाती रही है, लेकिन पार्टी नेताओं की चिंताओं पर शुरुआत में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान और बाद में समाचार एजेंसी ANI से चर्चा करते हुए राठौर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रम, विशेषकर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर तीन चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों ने कांग्रेस की चिंताओं को और मजबूत किया है।हालांकि, SIR के कारण 13 करोड़ से अधिक लोगों के मतदान अधिकार से वंचित होने का आंकड़ा राठौर का दावा है। उपलब्ध जानकारी में इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले आंकड़े या विस्तृत दस्तावेज शामिल नहीं हैं।
केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप
कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस लगातार इन मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर करती रही है।राठौर ने कहा कि राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने संविधान, लोकतंत्र और स्वतंत्र संस्थाओं की स्थिति को लेकर पहले भी चेतावनी दी थी। उनका आरोप है कि उस समय इन चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया।कांग्रेस नेता के अनुसार, अब चुनाव आयोग से संबंधित घटनाक्रम ने पार्टी के सवालों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने विशेष रूप से मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया का उल्लेख किया।हालांकि, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किए जाने का आरोप कांग्रेस का राजनीतिक दृष्टिकोण है। उपलब्ध विवरण में इस आरोप के समर्थन में किसी विशिष्ट संवैधानिक उल्लंघन के न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।
SIR प्रक्रिया को लेकर जताई चिंता
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची में शामिल नामों और संबंधित विवरणों की समीक्षा की जाती है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है।इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने की आशंका है और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।राठौर ने दावा किया कि SIR की वजह से 13 करोड़ से अधिक लोग वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह बयान मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस की आशंकाओं को दर्शाता है।हालांकि, इस दावे को संभावित रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की प्रमाणित संख्या नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित आंकड़ों, मतदाता सूची में बदलाव और पात्र मतदाताओं की स्थिति से जुड़े प्रमाणों की आवश्यकता होगी।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
राठौर ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से जुड़े हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर तीन चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई हैं।उन्होंने इन खबरों को कांग्रेस की पहले से व्यक्त की जा रही चिंताओं से जोड़ते हुए कहा कि इससे स्वतंत्र संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते हैं।चुनाव आयोग देश में चुनावों के संचालन और मतदाता सूची से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाता है। ऐसे में आयोग की निर्णय प्रक्रिया, निष्पक्षता और पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।हालांकि, आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों को किसी निर्णय की अवैधता या संस्थागत निष्पक्षता में कमी का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित घटनाओं और आधिकारिक रिकॉर्ड का अलग से मूल्यांकन आवश्यक है।
राहुल गांधी की चिंताओं का भी किया उल्लेख
कांग्रेस प्रवक्ता ने अपने बयान में राहुल गांधी और पार्टी के अन्य नेताओं की ओर से पहले उठाए गए सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं से संबंधित विषयों पर अपनी चिंता व्यक्त करती रही है।राठौर के मुताबिक, शुरुआत में इन मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। अब चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े विवादों के कारण ये विषय फिर चर्चा में हैं।कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जोड़कर देख रही है। पार्टी की चिंता है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।
मतदान के अधिकार पर बहस तेज
मतदाता सूची में पात्र नागरिकों का नाम दर्ज होना चुनाव में भाग लेने के लिए महत्वपूर्ण है। पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान गलत प्रविष्टियों को सुधारने के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि पात्र मतदाताओं के नाम अनजाने में सूची से बाहर न हों।SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां इसी विषय पर केंद्रित हैं। वहीं, राठौर के बयान में उठाए गए सवालों और उनके दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड का परीक्षण जरूरी है।फिलहाल कुलदीप सिंह राठौर ने शुक्रवार को शिमला में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस का पक्ष सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि SIR से 13 करोड़ से अधिक लोग मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं और आरोप लगाया कि हालिया घटनाक्रम ने पार्टी की चिंताओं को मजबूत किया है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
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