- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- CM सुक्खू का बड़ा...
CM सुक्खू का बड़ा ऐलान: देवी-देवताओं का नजराना बढ़ा, बजंतरियों को मिलेगा अधिक मानदे

हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने देव संस्कृति के संरक्षण, ग्रामीण विकास और आपदा प्रभावित परिवारों की सहायता को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। कुल्लू दशहरा से जुड़ी घोषणाओं के अनुसार देवी-देवताओं के नजराने में पांच प्रतिशत और बजंतरियों के मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की बात कही गई है। इसके साथ ही देवताओं के गूर को 1,100 रुपये प्रति व्यक्ति और महिला मंडलों को 35-35 हजार रुपये देने की घोषणा का उल्लेख किया गया है। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित परिवारों के लिए सहायता राशि सात लाख से बढ़ाकर आठ लाख रुपये करने की भी बात कही है।
इन घोषणाओं को हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहन देने और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को आर्थिक राहत पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इन सभी घोषणाओं के एक ही कार्यक्रम में किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
देवी-देवताओं के नजराने में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की प्राचीन देव संस्कृति का प्रमुख उत्सव है। इस आयोजन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवताओं की पारंपरिक शोभायात्राएं पहुंचती हैं। इनके साथ पुजारी, गूर, कारदार और बजंतरी भी शामिल होते हैं।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने देव परंपराओं से जुड़े लोगों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। देवी-देवताओं के नजराने में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी से उत्सव में भाग लेने वाली देव समितियों को आर्थिक सहयोग मिलेगा।
नजराना वह निर्धारित राशि है, जो दशहरा उत्सव में भाग लेने वाले देवी-देवताओं की परंपरागत व्यवस्थाओं के लिए प्रदान की जाती है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने अक्टूबर 2024 में भी देवी-देवताओं के नजराने में पांच प्रतिशत और बजंतरियों के मानदेय तथा दूरी भत्ते में 20-20 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
बजंतरियों के मानदेय में वृद्धि से कलाकारों को राहत
कुल्लू दशहरा में बजंतरियों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। ये पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से देवताओं की शोभायात्राओं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
ढोल, नगाड़े, करनाल और नरसिंगे जैसे वाद्ययंत्र हिमाचल की देव संस्कृति की पहचान हैं। बजंतरी इन वाद्ययंत्रों के माध्यम से पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।
मानदेय में बढ़ोतरी से इन कलाकारों को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। इससे पारंपरिक संगीत और लोक संस्कृति से जुड़े परिवारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
वर्ष 2023 में भी कुल्लू दशहरा के दौरान बजंतरियों के भत्ते में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा हुई थी। उस समय यह घोषणा विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने की थी।
देवताओं के गूर को 1,100 रुपये देने की घोषणा
उपलब्ध विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री ने देवताओं के गूर को 1,100 रुपये प्रति व्यक्ति देने की भी घोषणा की है।
हिमाचल की देव परंपरा में गूर का महत्वपूर्ण स्थान है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गूर देवताओं के प्रतिनिधि के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक गतिविधियों में भूमिका निभाते हैं।
इनके माध्यम से कई स्थानीय धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। ऐसे में आर्थिक प्रोत्साहन को देव संस्कृति से जुड़े लोगों के सम्मान और सहयोग की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, इस भुगतान की पात्रता, वितरण प्रक्रिया और लागू होने की तारीख के संबंध में आधिकारिक आदेश की पुष्टि आवश्यक है।
महिला मंडलों को मिलेंगे 35-35 हजार रुपये
महिला सशक्तीकरण की दिशा में महिला मंडलों को 35-35 हजार रुपये देने की घोषणा भी महत्वपूर्ण है।
हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला मंडल सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
ये संगठन गांवों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्य करते हैं।
आर्थिक सहायता मिलने से महिला मंडल स्थानीय स्तर पर अपनी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकेंगे।
सितंबर 2026 में मुख्यमंत्री ने मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भी महिला मंडलों के लिए 35-35 हजार रुपये देने की घोषणा की थी।
आपदा प्रभावित परिवारों को आठ लाख रुपये की राहत
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाने की घोषणा को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घरों और संपत्ति का नुकसान उठाना पड़ा है।
सरकार ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सहायता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
नवंबर 2025 में मंडी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आपदा राहत पैकेज 7.70 लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये करने की घोषणा की थी। इस पैकेज में मकान निर्माण की सहायता के अतिरिक्त घरेलू सामान खरीदने की राशि भी शामिल थी।
जरूरतमंदों को राहत देने के लिए नियमों में बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा है कि आपदा प्रभावित परिवारों की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए राहत संबंधी व्यवस्थाओं में बदलाव जरूरी था।
प्राकृतिक आपदा में मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद परिवारों के सामने आवास, भोजन, कपड़े और अन्य जरूरी सुविधाओं की समस्या खड़ी हो जाती है।
ऐसे में आर्थिक सहायता की राशि बढ़ाने का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को पुनर्वास में मदद करना है।
राज्य सरकार पहले भी राहत राशि की विभिन्न किस्तों का वितरण कर चुकी है। नवंबर 2025 में मंडी, कुल्लू और बिलासपुर जिलों के 4,914 प्रभावित लाभार्थियों को 81.28 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई थी।
देव संस्कृति और ग्रामीण विकास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री सुक्खू का कहना है कि हिमाचल प्रदेश की पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सुंदरता से है।
कुल्लू दशहरा जैसे आयोजन स्थानीय लोगों की आस्था के साथ-साथ पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़े हैं।
इन आयोजनों में भाग लेने वाले पारंपरिक कलाकारों, देव समितियों और स्थानीय संगठनों को प्रोत्साहन मिलने से सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
इसके अलावा महिला मंडलों को आर्थिक सहायता और आपदा प्रभावितों के पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
घोषणाओं के क्रियान्वयन पर टिकी लोगों की उम्मीदें
मुख्यमंत्री की विभिन्न घोषणाओं से देव संस्कृति से जुड़े लोगों, महिला मंडलों और आपदा प्रभावित परिवारों को राहत की उम्मीद है।
हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए सरकारी आदेश, बजट और वितरण प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
विशेष रूप से आपदा प्रभावित परिवारों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि सहायता राशि निर्धारित समय पर उपलब्ध हो और पुनर्वास कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
प्रदेश सरकार के सामने अब इन घोषणाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की चुनौती है, ताकि सांस्कृतिक संरक्षण के साथ जरूरतमंद परिवारों को भी ठोस लाभ मिल सके।





