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हिमाचल प्रदेश
लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CM सुक्खू ने दिया न्याय का संदेश
Kiran
12 Oct 2026 3:02 PM IST

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Himachal मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को कहा कि लोकतंत्र में न्याय सिर्फ़ अदालती आदेशों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे निष्पक्षता, समझदारी और हालात की सही समझ से भी निर्देशित होना चाहिए। शिमला में हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सुक्खू ने कहा कि कानून का असली महत्व यह सुनिश्चित करने में है कि समाज के सबसे कमज़ोर वर्गों को भी न्याय मिलने की उम्मीद हो, ज़रूरतमंदों की आवाज़ सुनी जाए और हर नागरिक यह जानकर सुरक्षित महसूस करे कि उसके अधिकार सुरक्षित हैं।
सरकारी नौकरी से जुड़े एक फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक अहम स्तंभ है, लेकिन कभी-कभी अदालती फ़ैसले जनहित में शुरू की गई सरकारी पहलों के लिए मुश्किलें पैदा कर देते हैं। उन्होंने कहा, "2003 में सरकार ने फ़ैसला किया था कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को सीनियरिटी और इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिलेगा। हालाँकि, लगभग दो दशक बाद, कोर्ट ने लागू भर्ती नियमों में ऐसा कोई प्रावधान न होने के बावजूद वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया।" सुक्खू ने कहा कि कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके वित्तीय लाभों से वंचित नहीं करना चाहती, लेकिन उसे राज्य के खजाने की स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमएम सुंदरेश ने हिमाचल प्रदेश को "धरती पर स्वर्ग" बताया और समाज में लॉ ग्रेजुएट्स की खास भूमिका पर ज़ोर दिया। ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "कानून के छात्र के तौर पर आप दूसरों से अलग हैं। आप एक सोशल इंजीनियर, सोशल डॉक्टर और सोशल आर्किटेक्ट हैं।" जस्टिस सुंदरेश ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कानून और न्याय के सम्मान के लिए कानूनी प्रावधानों की सिर्फ़ सैद्धांतिक समझ ही काफ़ी नहीं है। उन्होंने कहा कि न्याय को प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए ज्ञान, न्याय की मज़बूत भावना और सामाजिक ज़िम्मेदारी के प्रति पक्के संकल्प की ज़रूरत होती है। उन्होंने ग्रेजुएट्स को उभरती चुनौतियों के लिए तैयार रहने और नए क्षेत्रों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में महारत हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इससे पहले, मुख्यमंत्री ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए गोल्ड मेडल पाने वाले मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया ने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को डिग्रियाँ प्रदान कीं। इस मौके पर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश त्रिलोक सिंह चौहान को भी डॉक्टर ऑफ़ लॉज़ (ऑनरिस कॉज़ा) की डिग्री से सम्मानित किया गया। लॉ यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर प्रीति सक्सेना, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के जज और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
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