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HIMANCHAL हिमाचल: मानसून की बारिश इस साल देश के लिए आफत बनकर आई है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक लगातार भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में जहां बादल फटने और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं मैदानों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। आलम यह है कि दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल तक अधिकांश इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं। लगातार मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ों पर भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। कई जगह सड़कें टूट गई हैं और गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। इसके अलावा, बादल फटने की घटनाओं ने जन-जीवन को पूरी तरह से प्रभावित किया है। हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
मैदानी इलाकों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। गंगा, यमुना, कोसी और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल के कई जिलों में बाढ़ का पानी घरों और खेतों में भर गया है। इससे कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है और लाखों हेक्टेयर फसलें पानी में डूब गई हैं। पशुधन के बहने और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व स्वच्छता संकट ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत शिविरों में भेजा जा रहा है। पंजाब और हरियाणा में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों में पानी भर गया है।
दक्षिण भारत में भी बारिश का कहर जारी है। केरल और कर्नाटक में भारी वर्षा के कारण जलभराव और भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। कई ट्रेन और बस सेवाओं पर असर पड़ा है और परिवहन व्यवस्था ठप हो गई है। कुल मिलाकर, इस साल की मानसून बारिश ने देशभर में तबाही मचाई है। सरकार और प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। एनडीआरएफ और स्थानीय टीमें प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। बावजूद इसके, स्थिति गंभीर बनी हुई है और आने वाले दिनों में और अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।





