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मंडी में मुख्यमंत्री का पुतला जलाने को लेकर छात्रों और पुलिस में टकराव, छात्र नेता घायल

मंडी। मुख्यमंत्री का पुतला जलाने को लेकर मंडी में कॉलेज छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। मंडी उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने और उनके साथ मारपीट का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पुतला जलाने से रोकने के लिए दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठा लिया। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। पुलिस वाहन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कुछ छात्र नेता वाहन के सामने लेट गए।
घटना के दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान एक छात्र नेता के नाक पर चोट लगने की बात सामने आई, जबकि एक छात्रा भी प्रदर्शन के बीच बेहोश होकर गिर पड़ी। छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, छात्र सरदार पटेल यूनिवर्सिटी (SPU) को बहाल करने और हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी (HPU) में की गई फीस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे थे। इसी मांग को लेकर छात्र मंडी उपायुक्त कार्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री का पुतला जलाने की कोशिश की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों को पुतला जलाने से रोकने का प्रयास किया। इसी बीच पुलिस ने दो कार्यकर्ताओं को पकड़कर पुलिस वाहन में बैठा लिया। छात्रों ने इसका विरोध किया और पुलिस से उन्हें छोड़ने की मांग करने लगे। जब पुलिस वाहन को मौके से ले जाने की कोशिश की गई तो छात्र नेता वाहन के सामने लेट गए।
छात्र नेताओं के वाहन के सामने आने के बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस होने लगी। इसी दौरान धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और कुछ छात्रों के साथ मारपीट की गई।
छात्रों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। हालांकि, पुलिस की ओर से कार्रवाई को लेकर विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। छात्राओं का कहना था कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं, लेकिन कार्रवाई के दौरान महिला पुलिस पीछे खड़ी रही और पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं को हटाने की कोशिश की।
छात्राओं के आरोपों के बाद मौके पर हंगामा और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान डीएसपी हेडक्वार्टर के साथ भी छात्रों की नोकझोंक हुई। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ समय तक मौके पर तनाव बना रहा।
घटना में एक छात्र नेता के नाक पर चोट लगने की जानकारी सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश के दौरान हुई अफरा-तफरी में छात्र नेता घायल हुआ। वहीं, प्रदर्शन के बीच एक छात्रा अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर गई। साथी छात्रों ने उसे संभाला और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर है और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी को बहाल करना शामिल है। इसके साथ ही वे हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में बढ़ाई गई फीस को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
छात्र संगठनों का आरोप है कि फीस में बढ़ोतरी से विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा पहले ही महंगी होती जा रही है और फीस बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है। इसी कारण छात्र सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से फीस बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।
सरदार पटेल यूनिवर्सिटी को लेकर भी छात्रों में असंतोष है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे का सीधा असर मंडी और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर पड़ता है। छात्र चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय ले और विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर छात्रों के हित में कदम उठाए।
मुख्यमंत्री का पुतला जलाने की कोशिश के बाद पुलिस और छात्रों के बीच टकराव ने प्रदर्शन को राजनीतिक रंग भी दे दिया। छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। वहीं, पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया।
घटना के बाद छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ बल प्रयोग किया गया। छात्रों ने विशेष रूप से छात्राओं के साथ कथित धक्का-मुक्की को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कार्रवाई के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।
फिलहाल मंडी उपायुक्त कार्यालय के बाहर हुए इस घटनाक्रम को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। छात्रों की मांग है कि उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाए और पुलिस कार्रवाई की भी जांच हो। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रही।
छात्रों और पुलिस के बीच हुए इस टकराव ने हिमाचल में उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की एसपीयू बहाली तथा एचपीयू फीस वृद्धि से संबंधित मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।





