हिमाचल प्रदेश

16वें वित्त आयोग की अनुदान राशि के उपयोग पर केंद्र के नए सख्त निर्देश

Kavita2
30 Jun 2026 11:24 AM IST
16वें वित्त आयोग की अनुदान राशि के उपयोग पर केंद्र के नए सख्त निर्देश
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Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि के उपयोग को लेकर जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के बाद अब स्थानीय निकाय इस फंड का उपयोग कई प्रकार के छोटे और स्थानीय विकास कार्यों में नहीं कर सकेंगे।

नई गाइडलाइंस के अनुसार, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को अब स्ट्रीट लाइट लगाने, बेंच लगाने, टाइल्स बिछाने, छोटे मरम्मत कार्य करने, सीमित दायरे वाले निर्माण कार्य और अन्य इसी तरह के स्थानीय स्तर के छोटे विकास कार्यों पर वित्त आयोग की राशि खर्च करने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार का मानना है कि वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग केवल उन योजनाओं और कार्यों में किया जाना चाहिए, जो व्यापक विकास और दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करते हैं। छोटे और सीमित दायरे वाले कार्यों पर इस फंड के उपयोग से संसाधनों का प्रभावी उपयोग प्रभावित होता है।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी पंचायत या स्थानीय निकाय द्वारा इन प्रतिबंधित कार्यों पर अनुदान राशि खर्च की जाती है, तो संबंधित निकाय की वित्तीय सहायता को रोका भी जा सकता है। यह कदम फंड के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि वित्त आयोग की राशि का उपयोग केवल प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में किया जाना चाहिए, जैसे बुनियादी ढांचे का विकास, जल प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े बड़े और महत्वपूर्ण कार्य।

अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों से यह शिकायतें मिल रही थीं कि पंचायत स्तर पर वित्त आयोग की राशि का उपयोग छोटे और अल्पकालिक कार्यों में किया जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक विकास प्रभावित हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।

नई गाइडलाइन के बाद अब जिला परिषदों और पंचायत समितियों को अपने प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे वित्त आयोग के मानकों के अनुरूप ही योजनाओं को लागू करें।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में फंड के उपयोग की निगरानी और अधिक सख्ती से की जाएगी और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

इस निर्णय से पंचायत स्तर पर वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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