हिमाचल प्रदेश

कांगड़ा में दो बेटियों से दुर्व्यवहार, पुलिस ने दर्ज किया मामला

Kiran
10 Oct 2026 1:50 PM IST
कांगड़ा में दो बेटियों से दुर्व्यवहार, पुलिस ने दर्ज किया मामला
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कांगड़ा ज़िले में एक प्रवासी मज़दूर पर अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ कथित तौर पर यौन शोषण करने का मामला दर्ज किया गया है। लड़कियों की माँ के कथित तौर पर समुदाय के दबाव में आकर अपना समर्थन वापस लेने और मेडिकल जांच के लिए सहमति देने से इनकार करने के बाद, इस मामले की जांच को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। एक NGO द्वारा चलाए जा रहे स्कूल की छात्रा इन लड़कियों ने कथित शोषण के बारे में अपनी मौसी को बताया, जिन्होंने संगठन को सूचित किया। इसके बाद NGO ने चाइल्डलाइन को सतर्क किया और पुलिस ने 7 अक्टूबर को मामला दर्ज किया। आरोपी हिरासत में है।
कांगड़ा के SSP कुलभूषण वर्मा ने मामले की पुष्टि की और कहा कि संबंधित पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया गया है कि वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने लड़कियों के बयान दर्ज करवाएँ और उनकी काउंसलिंग की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि माँ की भी काउंसलिंग की जाएगी। मिली जानकारी के अनुसार, माँ शुरू में मामले को आगे बढ़ाने के लिए सहमत थी, लेकिन बाद में समुदाय के कथित दबाव के कारण उसने अपना समर्थन वापस ले लिया। लड़कियाँ अपनी मौसी के साथ रह रही हैं और अधिकारी उन्हें सरकारी शेल्टर होम में भेजने पर विचार कर रहे हैं। शुक्रवार को काउंसलिंग के लिए उन्हें कांगड़ा की बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया, लेकिन न तो उनकी माँ और न ही उनकी मौसी उनके साथ थीं।
मानवाधिकारों और वंचित लोगों के कल्याण के लिए काम करने वाले NGO 'उमंग फाउंडेशन' के चेयरमैन अजय श्रीवास्तव ने हिमाचल प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्थानीय पुलिस द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर भी चिंता जताई है। FIR में लगाई गई धाराएँ चिंता का मुख्य विषय बन गई हैं। NGO के अनुसार, लड़कियों के स्कूल में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में वे यौन शोषण (पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट) के बारे में बता रही हैं। 'द ट्रिब्यून' को NGO द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो मिला है।
पुलिस ने 'बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण' (POCSO) अधिनियम की धारा 8 और 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 75 लगाई है। POCSO अधिनियम की धारा 8 में यौन शोषण के लिए सज़ा का प्रावधान है, जबकि BNS की धारा 75 यौन उत्पीड़न से संबंधित है। POCSO एक्ट की धारा 3 और 4 में पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट (penetrative sexual assault) की परिभाषा और सज़ा के बारे में बताया गया है, जिसमें सज़ा के कड़े प्रावधान हैं। BNS की धारा 64 और 65 में रेप के लिए सज़ा तय की गई है, जिसमें गंभीर मामले और तय उम्र से कम उम्र के पीड़ितों से जुड़े अपराध भी शामिल हैं। अपराध की प्रकृति और FIR में लगाई गई धाराओं को लेकर लगे आरोपों के कारण इस मामले की गहन जांच की मांग उठी है।
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