हिमाचल प्रदेश

लाइसेंस लेकर ही कर सकेंगे भांग की खेती, सरकार ने बनाए नियम

Saba Naaz
21 July 2026 5:34 PM IST
लाइसेंस लेकर ही कर सकेंगे भांग की खेती, सरकार ने बनाए नियम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती को लेकर नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। सरकार ने साफ किया है कि राज्य में भांग की खेती केवल दवा निर्माण और वैज्ञानिक शोध जैसे निर्धारित कार्यों के लिए ही की जा सकेगी। इसके लिए किसानों और संस्थानों को सख्त नियमों का पालन करना होगा। खेती की पूरी प्रक्रिया जियो-टैगिंग और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी, ताकि किसी भी तरह के दुरुपयोग को रोका जा सके।

नई व्यवस्था के तहत भांग की खेती करने वाले लाइसेंसधारकों को फसल की सुरक्षा और नियमों के पालन की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। सरकार ने खेती के लिए कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था तैयार की है। खेतों की निगरानी जिला स्तर पर गठित समितियों द्वारा की जाएगी, जो समय-समय पर निरीक्षण करेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि खेती तय उद्देश्य के अनुसार ही हो रही है।

नए नियमों के अनुसार भांग की खेती के लिए न्यूनतम तीन एकड़ भूमि होना अनिवार्य किया गया है। इससे कम क्षेत्रफल वाली जमीन पर लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा खेत की चारों तरफ से फेंसिंग करनी होगी और खेत में प्रवेश के लिए केवल एक ही रास्ता रखने की अनुमति होगी। इससे फसल की सुरक्षा और निगरानी आसान होगी।

सरकार ने बीजों को लेकर भी नियम तय किए हैं। अब किसान या लाइसेंसधारी दूसरे राज्यों या विदेशों से भांग के बीज नहीं ला सकेंगे। खेती के लिए केवल हिमाचल में उपलब्ध और सरकार द्वारा स्वीकृत बीजों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे अवैध किस्मों की खेती पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

भांग की खेती के लिए आवेदन प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति या संस्था को सबसे पहले कृषि विभाग के पास आवेदन करना होगा। कृषि विभाग सभी जरूरी दस्तावेजों और औपचारिकताओं की जांच करने के बाद आवेदन को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कर एवं आबकारी विभाग को भेजेगा। दोनों विभाग मिलकर लाइसेंसधारकों की निगरानी करेंगे और समय-समय पर जांच भी करेंगे।

नियमों के तहत फसल कटाई को लेकर भी सख्ती बरती गई है। लाइसेंसधारी को फसल काटने से कम से कम 21 दिन पहले संबंधित अधिकारी को लिखित सूचना देनी होगी। इसके बाद पूरी फसल की कटाई एक ही बार में करनी होगी। आंशिक कटाई या अलग-अलग चरणों में फसल काटने की अनुमति नहीं होगी।

खेती की निगरानी के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाई जाएगी। इस समिति में पुलिस अधीक्षक, कृषि विभाग, बागवानी विभाग, वन विभाग, राजस्व विभाग, राज्य कर एवं आबकारी विभाग, ड्रग इंस्पेक्टर और जिला आयुर्वेद अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। समिति खेतों का निरीक्षण कर यह देखेगी कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है।

सरकार ने लाइसेंस फीस भी तय कर दी है। भांग के बीज की आपूर्ति के लाइसेंस के लिए 25 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं भांग की खेती के लाइसेंस के लिए तीन लाख रुपये फीस देनी होगी। इसके अलावा भांग की प्रोसेसिंग कर दवा या अन्य उत्पाद बनाने के लाइसेंस के लिए दो करोड़ रुपये शुल्क तय किया गया है।

सरकार का कहना है कि नियंत्रित खेती की यह व्यवस्था किसानों को नए अवसर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा और निगरानी बेहद जरूरी है। भांग की खेती का इस्तेमाल केवल औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नई नीति के बाद हिमाचल में भांग की खेती को लेकर संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन लाइसेंस, निगरानी और सुरक्षा से जुड़े कड़े प्रावधानों के कारण केवल योग्य और नियमों का पालन करने वाले लोग ही इसमें शामिल हो सकेंगे।

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