हिमाचल प्रदेश

बादल फटने से पुल बहा, जान जोखिम में सफर

Saba Naaz
26 July 2026 3:47 PM IST
बादल फटने से पुल बहा, जान जोखिम में सफर
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हिमाचल प्रदेश: लाहुल-स्पीति जिले में मौसम की मार लगातार जारी है। मयाड़ घाटी में बादल फटने के कारण धोन्धल नाले में अचानक आई बाढ़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज बहाव के चलते नाले पर बनाया गया अस्थायी पुल बह गया, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि ग्रामीण और वाहन चालक जान जोखिम में डालकर पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, मयाड़ घाटी के धोन्धल नाले में रात के समय बादल फटने की घटना हुई। इसके बाद नाले में पानी का बहाव काफी तेज हो गया और अस्थायी पुल इसकी चपेट में आ गया। पुल बहने के बाद क्षेत्र का संपर्क प्रभावित हुआ। हालांकि लोक निर्माण विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सड़क मार्ग को अस्थायी रूप से बहाल कर दिया है, लेकिन अभी भी वाहन चालकों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।

स्थानीय प्रशासन और विभाग की ओर से मौके पर मशीनें तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सड़क को तुरंत ठीक किया जा सके। इसके अलावा ग्रामीणों की सुविधा के लिए एक झूले की व्यवस्था भी की गई है। बावजूद इसके लोगों की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और उन्हें हर दिन जोखिम उठाकर अपने काम के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।

लाहुल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने बताया कि धोन्धल नाले की समस्या नई नहीं है। वर्षों से यहां छोटे और बड़े पुल बार-बार बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक इस नाले में करीब आठ से दस पुल बह चुके हैं। इस साल जून महीने से घाटी के कई नालों में लगातार बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।

विधायक ने कहा कि वह खुद मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रही हैं और ग्रामीणों की समस्याओं को समझ रही हैं। उन्होंने बताया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने धोन्धल नाले पर एक बड़े पुल को मंजूरी दे दी है। पुल निर्माण से जुड़े जरूरी कागजी काम पूरे किए जा रहे हैं और इसी साल इसके निर्माण कार्य को शुरू करने की तैयारी है।

लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विभाग के कर्मचारियों की ओर से सड़क संपर्क बनाए रखने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है, लेकिन बार-बार बादल फटने और बाढ़ आने के कारण किए गए प्रयासों को नुकसान पहुंच रहा है।

मयाड़ घाटी के लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अस्थायी पुलों के बहने से स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजाना काम पर जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। ग्रामीण लंबे समय से यहां स्थायी पुल बनाने की मांग कर रहे थे।

प्रशासन का कहना है कि आपदा की स्थिति में लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता है और जल्द से जल्द स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। बड़े पुल के निर्माण के बाद क्षेत्र के लोगों को हर साल आने वाली इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल ग्रामीणों को मौसम साफ होने और स्थायी व्यवस्था बनने तक सावधानी के साथ आवागमन करना पड़ रहा है।

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