हिमाचल प्रदेश

Naina Devi Temple में लंगर कचरे से बायोगैस, पर्यावरण के लिए नई पहल

Ratna Netam
5 April 2026 2:25 PM IST
Naina Devi Temple में लंगर कचरे से बायोगैस, पर्यावरण के लिए नई पहल
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर ने पर्यावरण संरक्षण और सतत ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मंदिर प्रशासन ने लंगर के शेष भोजन और जैविक कचरे को बायोगैस में परिवर्तित करने की योजना शुरू की है। इस कदम से न केवल कचरे का प्रभावी निपटान संभव हुआ है, बल्कि मंदिर की रसोई में ऊर्जा की खपत भी कम हो रही है।
मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लंगर का आनंद लेते हैं। इसके चलते उत्पन्न होने वाले भोजन कचरे का सही तरीके से निपटान करना हमेशा चुनौती रहा है। अब मंदिर प्रशासन ने इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ लिया है। उन्होंने एक बायोगैस संयंत्र स्थापित किया है, जिसमें लंगर का बचा हुआ भोजन, सब्जियों के छिलके और अन्य जैविक अपशिष्ट डाले जाते हैं। बायोगैस प्रक्रिया के दौरान यह कचरा मीथेन गैस में परिवर्तित हो जाता है, जिसे सीधे रसोई में खाना बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
इस पहल के जरिए मंदिर न केवल अपने ऊर्जा खर्च को कम कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहा है। बायोगैस उत्पादन से गैस और अन्य जीवाश्म ईंधन की खपत कम होती है, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। इसके साथ ही यह कदम अन्य धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी पेश करता है।
मंदिर के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल ऊर्जा बचत नहीं है, बल्कि यह एक सतत मॉडल तैयार करना है, जिससे समुदाय और पर्यावरण दोनों को लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि बायोगैस संयंत्र से उत्पन्न बचा हुआ कीचड़ जैविक खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो मंदिर के बाग-बगीचों और आसपास के किसान समुदाय के लिए उपयोगी होगा।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस पहल की काफी सराहना की है। उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक स्थल का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे सामाजिक संस्थान पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे छोटे और प्रभावी कदम पूरे प्रदेश में सतत विकास को बढ़ावा दे सकते हैं। बायोगैस तकनीक अपनाने से कचरे का निपटान आसान हो जाता है, ऊर्जा की बचत होती है और पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
इस तरह, नैना देवी मंदिर की यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज और पर्यावरण के लिए भी एक सकारात्मक बदलाव की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
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