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हिमाचल के दूध उत्पादकों को बड़ी सौगात, प्रोत्साहन राशि हुई दोगुनी, अब हर लीटर पर मिलेंगे 6 रुपये

शिमला। हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादन और पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने पात्र दूध उत्पादकों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि तीन रुपये से बढ़ाकर छह रुपये प्रति लीटर कर दी है। इस फैसले से गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध बेचने वाले पात्र पशुपालकों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है। सरकार ने योजना के लिए 14 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे पात्र किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के निर्णयों से हजारों पशुपालक परिवारों को आर्थिक लाभ मिल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जारी बयान में केवल सिंह पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार दूध उत्पादकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को पशुपालन के माध्यम से नियमित आमदनी उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने दूध प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली राशि को दोगुना कर दिया है। पहले पात्र दूध उत्पादकों को प्रति लीटर तीन रुपये का प्रोत्साहन मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर छह रुपये कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत पात्र गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध की आपूर्ति करने वाले पशुपालकों को बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि मिलेगी। सरकार ने इसके लिए 14 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है।
इस योजना की विशेषता यह है कि प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। डीबीटी व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी।
पठानिया ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार पशुपालन को केवल पारंपरिक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार का उद्देश्य इसे सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका के साधन के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश दूध खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। उनके अनुसार, सरकार ने गाय और भैंस के दूध का खरीद मूल्य बढ़ाकर पशुपालकों को बेहतर आर्थिक लाभ उपलब्ध कराया है।
पठानिया ने बताया कि राज्य सरकार ने गाय के दूध का खरीद मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह भैंस के दूध का खरीद मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
इस प्रकार गाय के दूध के खरीद मूल्य में 29 रुपये और भैंस के दूध में 24 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इन फैसलों से सरकारी खरीद व्यवस्था से जुड़े किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की बात कही जा रही है।
पठानिया के अनुसार, दूध खरीद मूल्य बढ़ाने के निर्णय से प्रदेश के दूध उत्पादकों को प्रतिमाह लगभग 48.86 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल रहा है। हालांकि यह आंकड़ा उनके बयान पर आधारित है और इसका स्वतंत्र वित्तीय सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
प्रदेश में दूध की सरकारी खरीद की मात्रा भी बढ़ने की जानकारी दी गई है। केवल सिंह पठानिया ने बताया कि पहले प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर दूध की खरीद होती थी, जो अब बढ़कर लगभग तीन लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है।
उन्होंने इसे सरकार की डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने वाली नीतियों का सकारात्मक परिणाम बताया। उनके अनुसार, बेहतर खरीद मूल्य मिलने से पशुपालकों में दूध उत्पादन के प्रति रुचि बढ़ रही है।
हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित कृषि भूमि होने के कारण डेयरी व्यवसाय कई परिवारों के लिए अतिरिक्त आमदनी का महत्वपूर्ण साधन है।
ऐसे में दूध की खरीद कीमत और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि से पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिल सकती है।
हालांकि पशुपालन में पशु आहार, दवाइयों, देखभाल, परिवहन और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए किसानों की वास्तविक आय में कितना सुधार होगा, यह उत्पादन लागत और दूध की बिक्री की मात्रा पर भी निर्भर करेगा।
राज्य सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ उसकी खरीद, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को भी मजबूत करने पर काम कर रही है।
पठानिया ने बताया कि कांगड़ा जिले के ढगवार में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस संयंत्र की प्रारंभिक क्षमता प्रतिदिन 1.50 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी।
इस परियोजना का उद्देश्य दूध उत्पादकों को बेहतर संग्रहण और प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त आने वाले वर्षों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में दूध संग्रहण और प्रसंस्करण सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
सरकार का प्रयास है कि दूध उत्पादकों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक व्यवस्थित बाजार उपलब्ध हो और दुग्ध सहकारी समितियों की क्षमता बढ़ाई जा सके।
केवल सिंह पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार की योजनाओं का असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों को बेहतर कीमत और नियमित भुगतान मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
उन्होंने बताया कि मिलाप चंद सहित कई किसानों ने उनसे मुलाकात करके मुख्यमंत्री के फैसलों के प्रति आभार व्यक्त किया है।
पठानिया के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य पशुपालकों को समय पर भुगतान, उचित खरीद मूल्य और आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को भी पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जोड़ने की जरूरत है। यदि यह क्षेत्र लाभकारी बनता है, तो ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
विशेष रूप से दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय स्थानीय स्तर पर आय का साधन बन सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
नई दूध प्रोत्साहन योजना का लाभ सभी दूध बेचने वालों को स्वतः नहीं मिलेगा। यह सहायता निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले उन उत्पादकों के लिए है, जो पात्र गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों को दूध की आपूर्ति करते हैं।
हिमाचल प्रदेश पशुपालन विभाग की योजना संबंधी जानकारी के अनुसार, दूध की निर्धारित गुणवत्ता और पात्रता संबंधी शर्तों का पालन भी आवश्यक है। इसलिए किसानों को अपनी संबंधित सहकारी समिति से पात्रता और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
फिलहाल राज्य सरकार के इस फैसले से पात्र दूध उत्पादकों को पहले के मुकाबले प्रति लीटर तीन रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई पात्र किसान प्रतिदिन 20 लीटर दूध योजना के तहत बेचता है, तो उसे 30 दिनों में पहले की तुलना में 1,800 रुपये अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिल सकती है।
हालांकि वास्तविक भुगतान दूध की पात्र मात्रा, गुणवत्ता और योजना के नियमों पर निर्भर करेगा।
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के फैसले का स्वागत करते हुए केवल सिंह पठानिया ने कहा कि दूध उत्पादकों के लिए उचित कीमत, प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता और बेहतर प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन कदमों से प्रदेश में डेयरी व्यवसाय को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।





