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शिमला ; हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में आउटसोर्स आधार पर होने वाली नई भर्तियों पर रोक लगा दी गई है। अब शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सरकारी डिग्री कॉलेजों और संस्कृत महाविद्यालयों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नई नियुक्ति वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के बाद ही की जा सकेगी। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक राकेश कुमार ने सरकारी डिग्री कॉलेजों और संस्कृत महाविद्यालयों के प्राचार्यों को वित्त विभाग के सर्कुलर की प्रति भेजते हुए इसका सख्ती से पालन करने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की नई आउटसोर्स नियुक्ति नहीं की जाएगी।
वित्त विभाग ने 11 जून को जारी अपने आदेश में कहा था कि पूर्व लिखित स्वीकृति के बिना किसी भी नई आउटसोर्स सेवा को नियुक्त, तैनात या अनुबंध के आधार पर नहीं रखा जा सकेगा। इस आदेश के बाद सभी विभागों को नई आउटसोर्स भर्तियों पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का यह कदम राज्य में बढ़ते आउटसोर्स कर्मचारियों और उससे जुड़े वित्तीय भार को नियंत्रित करने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है। विभागों में जरूरत के आधार पर आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती रही है, लेकिन अब प्रत्येक नई नियुक्ति से पहले वित्त विभाग की मंजूरी अनिवार्य होगी।
शिक्षा विभाग में लंबे समय से विभिन्न कार्यों के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ली जाती रही हैं। इनमें कार्यालय सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर, चतुर्थ श्रेणी कार्य, सुरक्षा कर्मी और अन्य तकनीकी व गैर-तकनीकी पद शामिल हैं। अब इन पदों पर नई नियुक्ति के लिए संस्थानों को पहले वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यकता और उपलब्ध बजट के आधार पर ही हो। इससे सरकारी धन के उचित उपयोग और कर्मचारियों की जरूरत का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।
वित्त विभाग के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों को सतर्क कर दिया है। कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे बिना सक्षम अनुमति के किसी भी आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू न करें।
अधिकारियों का कहना है कि पहले कई बार विभागों में स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी जाती थी। अब नई व्यवस्था के तहत हर नियुक्ति की समीक्षा होगी और उसके बाद ही मंजूरी दी जाएगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर सरकार समय-समय पर नीतियां बनाती रही है। कई विभागों में स्थायी कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स सेवाओं का सहारा लिया जाता है। हालांकि, सरकार अब इस व्यवस्था को अधिक नियंत्रित और व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठा रही है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में पहले से आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, उनकी सेवाओं पर इस आदेश का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह निर्देश मुख्य रूप से नई नियुक्तियों और नई आउटसोर्स सेवाओं की शुरुआत पर लागू होगा।
कॉलेज प्रबंधन को अब किसी भी अतिरिक्त मानव संसाधन की आवश्यकता होने पर पहले प्रस्ताव तैयार कर संबंधित प्रक्रिया के तहत वित्त विभाग से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही नियुक्ति की जा सकेगी।
इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में नई आउटसोर्स भर्तियों की प्रक्रिया धीमी हो सकती है, लेकिन सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना है।
वित्त विभाग के आदेश को लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आने वाले समय में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े सभी मामलों में वित्त विभाग की भूमिका अहम होगी।
सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर वित्तीय नियंत्रण मजबूत होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर संस्थानों को नई नियुक्तियों के लिए पहले से बेहतर योजना बनानी होगी। अब शिक्षा विभाग में आउटसोर्स आधार पर किसी भी नई भर्ती का रास्ता वित्त विभाग की मंजूरी से होकर ही गुजरेगा।





