हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में आधे से ज्यादा साल खराब मौसम का असर

Admindelhi1
5 Nov 2026 3:24 PM IST
हिमाचल प्रदेश में आधे से ज्यादा साल खराब मौसम का असर
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हिमाचल प्रदेश में मौसम की चरम घटनाओं ने बढ़ाई मुश्किलें

शिमला: हिमाचल प्रदेश में इस साल मौसम की मार किसी एक मौसम या कुछ दिनों तक सीमित नहीं रही। जनवरी से सितंबर के बीच करीब 175 दिन ऐसे रहे, जब प्रदेश में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाएं दर्ज की गईं। देशभर के राज्यों में उत्तर प्रदेश के साथ हिमाचल इस मामले में सबसे आगे रहा। यह तस्वीर सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की क्लाइमेट इंडिया 2026 रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार देश में इस साल के शुरुआती नौ महीनों के दौरान 273 में से 92 फीसदी दिनों में कहीं न कहीं मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाएं हुईं। हिमाचल और उत्तर प्रदेश में करीब 64 फीसदी दिनों में ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं।

रिपोर्ट का हिमाचल से जुड़ा सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि प्रदेश में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाओं की अवधि काफी लंबी रही। करीब 175 दिन इन घटनाओं का सामने आना बताता है कि मौसम का असर किसी एक दौर तक सीमित नहीं रहा।

देश में फरवरी सबसे सूखा, जुलाई में भी तापमान अधिक

सीएसई की रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्ष 2026 का फरवरी महीना 1901 के बाद सबसे सूखा रहा। यह पिछले 125 वर्षों में चौथा सबसे गर्म फरवरी भी दर्ज किया गया। जुलाई में देश का औसत तापमान तीसरे सबसे ऊंचे स्तर पर रहा, जबकि न्यूनतम तापमान के लिहाज से यह दूसरा सबसे गर्म जुलाई रहा।

उत्तर-पश्चिम भारत में फरवरी पिछले 125 वर्षों में तीसरी सबसे गर्म और तीसरी सबसे सूखी रही। इस दौरान औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.15 डिग्री सेल्सियस अधिक था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2026 में शीतलहर और ठंडे दिनों की घटनाएं पिछले पांच वर्षों में दूसरी सबसे कम रहीं। फरवरी में पांच वर्षों के दौरान पहली बार शीतलहर की कोई घटना दर्ज नहीं हुई।

देश में मौसम से तबाही के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले

रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से सितंबर 2026 के बीच देश में मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाओं के कारण 3,220 लोगों की मौत हुई और करीब 42.5 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलों को नुकसान पहुंचा। इस दौरान 1,28,334 मकान क्षतिग्रस्त हुए और 47,244 पशुओं की मौत हुई। राज्यों में सबसे अधिक 811 मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं।

सीएसई के पांच साल के विश्लेषण में भी मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाओं का असर बढ़ता दिखाई दिया है। वर्ष 2022 और 2023 में ऐसी घटनाओं वाले दिनों का अनुपात 86 से 88 फीसदी के बीच था। वर्ष 2024 में यह 93 फीसदी और 2025 में 99 फीसदी तक पहुंच गया। वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में यह 92 फीसदी रहा। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में देशभर में ऐसी घटनाओं के कारण 16,303 लोगों की मौत हुई।

सीएसई की रिपोर्ट में मौसम से जुड़ी घटनाओं के लगातार सामने आने के कारण आपदा प्रबंधन की तैयारी को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। इसमें राहत और बचाव कार्यों के साथ जोखिम कम करने, जल निकासी व्यवस्था सुधारने, हरित क्षेत्रों और जंगलों को सुरक्षित रखने तथा स्थानीय स्तर पर आपदा से निपटने की तैयारी पर ध्यान देने की बात कही गई है।

हिमाचल में कम बारिश के बावजूद मानसून में 366 लोगों की मौत

हिमाचल में मानसून के दौरान सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं में जान-माल का नुकसान हुआ। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार मानसून के दौरान प्रदेश में 366 लोगों की मौत हुई, 614 लोग घायल हुए और चार लोग लापता हुए। इस दौरान 579 पशुओं की भी जान गई।

मकानों को हुए नुकसान की बात करें, तो प्रदेश में 43 पक्के और 101 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। वहीं, 161 पक्के और 365 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा। मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 3,412.80 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है।

जिलावार आंकड़ों के अनुसार शिमला में सबसे अधिक 23 लोगों की मौत हुई। चंबा में 22, कांगड़ा में 19, मंडी और लाहौल-स्पीति में 18-18 तथा सिरमौर में 16 लोगों की जान गई।

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