हिमाचल प्रदेश

हिमाचल में सेब उत्पादन घटा 95 लाख से ज्यादा बक्सों की कमी

Ratna Netam
9 Oct 2026 5:30 PM IST
हिमाचल में सेब उत्पादन घटा 95 लाख से ज्यादा बक्सों की कमी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस सीजन में सेब का उत्पादन काफी कम रहा है। पिछले साल बाजार में 2.25 करोड़ से अधिक सेब के बक्से पहुंचे थे, जबकि इस बार अब तक केवल 1.30 करोड़ बक्से ही बाजार तक पहुंच पाए हैं। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में बाजार में पहुंचने वाले सेब के बक्सों की संख्या में 95 लाख से अधिक की कमी सामने आई है। मंत्री ने इस गिरावट के लिए प्रतिकूल मौसम को प्रमुख कारण बताया है।शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस वर्ष मौसम की कई प्रतिकूल परिस्थितियों ने सेब उत्पादन को प्रभावित किया है। इनमें पर्याप्त चिलिंग आवर्स नहीं मिलना, फूल आने के समय ठंड पड़ना, बेमौसम बारिश, कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि और कुछ स्थानों पर सूखे जैसी परिस्थितियां शामिल हैं। इन कारणों से राज्य में सेब की फसल पर असर पड़ा है।
पिछले साल से काफी कम रहा सेब उत्पादन
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि इस सीजन में बाजार तक पहुंचने वाले सेब के बक्सों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 2.25 करोड़ से अधिक बक्से बाजार में पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 1.30 करोड़ बक्से ही पहुंच सके हैं।मंत्री ने कहा, "पिछले साल के मुकाबले इस साल सेब का उत्पादन काफी कम रहा है। आज तक बाजार में सिर्फ 1.30 करोड़ बक्से ही पहुंचे हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 2.25 करोड़ से ज्यादा थी।"इन आंकड़ों के आधार पर बाजार में पहुंचने वाले सेब के बक्सों की संख्या में कम से कम 95 लाख की कमी दिखाई देती है। पिछले साल के 2.25 करोड़ बक्सों को आधार मानें तो यह गिरावट लगभग 42 प्रतिशत बनती है।हालांकि, इस वर्ष का आंकड़ा अब तक बाजार में पहुंचे बक्सों का है। इसलिए इसे पूरे सीजन के अंतिम उत्पादन आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
खराब मौसम ने बिगाड़ा सेब उत्पादन का गणित
मंत्री जगत सिंह नेगी ने सेब उत्पादन में गिरावट के पीछे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया। उनके अनुसार, इस बार सेब की फसल को कई चरणों में मौसम संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा।सेब की खेती में तापमान, बारिश और मौसम की स्थिति का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। विशेष रूप से फूल आने और फल विकसित होने की अवधि में अनुकूल मौसम की आवश्यकता होती है।नेगी ने बताया कि इस वर्ष पर्याप्त चिलिंग आवर्स नहीं मिलने के साथ फूल आने के समय ठंड, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियां सामने आईं। कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति भी रही।इन सभी कारणों को उन्होंने इस साल सेब उत्पादन में आई गिरावट से जोड़ा है।
चिलिंग आवर्स की कमी से प्रभावित हुई फसल
सेब के पेड़ों के लिए सर्दियों के दौरान एक निश्चित अवधि तक कम तापमान मिलना महत्वपूर्ण होता है। इसे चिलिंग आवर्स कहा जाता है। यह प्रक्रिया पेड़ों की प्राकृतिक वृद्धि और अगले मौसम में फूल आने की प्रक्रिया से जुड़ी होती है।यदि सेब के पेड़ों को पर्याप्त ठंड नहीं मिलती, तो उनकी सामान्य विकास प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे फूल आने की स्थिति और फल बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ने की संभावना रहती है।बागवानी मंत्री ने इस वर्ष उत्पादन में कमी के कारणों में चिलिंग आवर्स की कमी को भी शामिल किया है।हालांकि, राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में चिलिंग आवर्स कितने कम रहे और इससे उत्पादन पर कितना प्रभाव पड़ा, इसके विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
फूल आने के समय ठंड ने बढ़ाई परेशानी
जगत सिंह नेगी के अनुसार, सेब के पेड़ों पर फूल आने के दौरान ठंड पड़ना भी इस वर्ष फसल प्रभावित होने के कारणों में शामिल रहा।सेब उत्पादन में फूल आने का समय महत्वपूर्ण होता है। इसी चरण में आगे फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। यदि इस दौरान मौसम अनुकूल नहीं रहता, तो फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।मंत्री ने बताया कि इस बार फूल आने के समय ठंड की स्थिति बनी रही। इसके साथ ही मौसम में अन्य बदलावों ने भी फसल को प्रभावित किया।हालांकि, फूल आने के दौरान तापमान कितना नीचे गया और किन क्षेत्रों में इसका सबसे अधिक असर पड़ा, इस बारे में अलग से जानकारी नहीं दी गई है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का असर
इस वर्ष सेब उत्पादन में कमी के पीछे बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को भी महत्वपूर्ण कारण बताया गया है।मंत्री ने कहा कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि हुई, जबकि कई स्थानों पर बेमौसम बारिश ने फसल को प्रभावित किया।ओलावृष्टि से सेब के फलों को प्रत्यक्ष नुकसान पहुंच सकता है। इससे फलों की बाहरी गुणवत्ता प्रभावित होने और बाजार में बिक्री योग्य उपज कम होने का जोखिम रहता है।इसी तरह लगातार या गलत समय पर होने वाली बारिश भी बागवानी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।हालांकि, इस वर्ष ओलावृष्टि से प्रभावित बागवानों की संख्या, नुकसान का क्षेत्रफल और फसल क्षति का विस्तृत आकलन उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति भी बनी
सेब उत्पादन में गिरावट के कारणों में मंत्री ने कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियों का भी उल्लेख किया है।सेब के पेड़ों की वृद्धि और फलों के विकास के लिए पर्याप्त नमी महत्वपूर्ण होती है। लंबे समय तक पानी की कमी रहने पर पौधों की वृद्धि और फल विकास प्रभावित हो सकता है।हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मौसम की परिस्थितियां अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न रहीं। मंत्री के बयान के अनुसार, जहां कुछ स्थानों पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई, वहीं कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति बनी रही।इस तरह राज्य के सेब उत्पादकों को मौसम से जुड़ी अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
सेब बागवानों की आय पर पड़ सकता है असर
हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती बागवानी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में किसान और बागवान इस फसल से जुड़े हुए हैं।सेब उत्पादन में कमी का असर बागवानों की आय पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक प्रभाव बाजार में मिलने वाली कीमतों, फसल की गुणवत्ता और बिक्री की मात्रा पर निर्भर करेगा।मंत्री ने फिलहाल बाजार में पहुंचे बक्सों की संख्या और उत्पादन घटने के मौसम संबंधी कारणों की जानकारी दी है। इस वर्ष सेब की औसत कीमत, कुल बिक्री और बागवानों को हुए आर्थिक नुकसान के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।ऐसे में उत्पादन में कमी को सीधे किसी निश्चित आर्थिक नुकसान की राशि से जोड़ना उचित नहीं होगा।
अंतिम उत्पादन आंकड़ों का इंतजार
हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान से स्पष्ट है कि इस सीजन में सेब की बाजार आवक पिछले साल की तुलना में काफी कम रही है।पिछले वर्ष 2.25 करोड़ से अधिक बक्सों के मुकाबले इस बार अब तक 1.30 करोड़ बक्से बाजार पहुंचे हैं। मंत्री ने इस गिरावट के लिए चिलिंग आवर्स की कमी, फूल आने के समय ठंड, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और सूखे को जिम्मेदार बताया है।अब सीजन के अंतिम आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि कुल उत्पादन में कितनी गिरावट दर्ज हुई और बाजार में सेब की आवक किस स्तर तक पहुंची।
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