हिमाचल प्रदेश

अदाणी के सेब रेट से बागवानों की चिंता बढ़ी

Kavita2
31 Aug 2026 5:28 PM IST
अदाणी के सेब रेट से बागवानों की चिंता बढ़ी
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हिमाचल प्रदेश : सेब बागवानों के लिए इस सीजन में बड़ी चिंता सामने आई है। जिस समय बागवानों को उम्मीद थी कि सेब के अच्छे दाम मिलेंगे, उसी समय अदाणी समूह की ओर से जारी खरीद रेट ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

अदाणी समूह की ओर से प्रीमियम गुणवत्ता वाले सेब के लिए घोषित खरीद मूल्य मौजूदा मंडी भाव से करीब 300 रुपये प्रति पेटी कम बताया जा रहा है। इससे बागवानों के साथ-साथ आढ़तियों में भी चिंता का माहौल है।

मंडी भाव और कंपनी रेट में अंतर

जानकारी के अनुसार, अदाणी समूह प्रीमियम गुणवत्ता वाले सेब की पेटी करीब 2380 रुपये में खरीदने की तैयारी में है।

वहीं, शिमला की पराला और भट्टाकुफर एपीएमसी मंडियों में इसी गुणवत्ता का सेब करीब 2700 रुपये प्रति पेटी तक बिक रहा है।

मंडी और कंपनी के खरीद रेट में अंतर को लेकर बागवानों का कहना है कि इससे बाजार की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

बड़ी कंपनियों से थी बेहतर दाम की उम्मीद

सेब उत्पादकों को उम्मीद थी कि बड़ी कंपनियों के बाजार में उतरने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उन्हें अपनी फसल के बेहतर दाम मिल सकेंगे।

बागवानों का मानना था कि जब बड़ी कंपनियां खरीद शुरू करेंगी तो मंडियों में भी खरीददारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे सेब के भाव में सुधार आएगा।

लेकिन अदाणी के घोषित रेट मंडी भाव से कम होने के बाद अब बागवानों की उम्मीदों को झटका लगा है।

मंडियों पर भी पड़ सकता है असर

बागवानों और आढ़तियों को आशंका है कि यदि बड़ी मात्रा में सेब कंपनियों के पास जाने लगा तो इसका असर एपीएमसी मंडियों पर भी पड़ सकता है।

उनका कहना है कि बड़ी कंपनियों के कम रेट से बाजार में कीमतों पर दबाव बन सकता है।

यदि कंपनियां कम कीमत पर अधिक मात्रा में सेब खरीदती हैं तो मंडियों में भी खरीददार रेट कम करने की कोशिश कर सकते हैं।

आढ़तियों की बढ़ी चिंता

सेब कारोबार से जुड़े आढ़तियों का कहना है कि मंडियों में पहले से ही कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं।

ऐसे में बड़ी कंपनियों के खरीद रेट कम होने से कारोबार प्रभावित होने की संभावना है।

आढ़तियों को डर है कि अगर बागवान कंपनियों की ओर ज्यादा रुख करेंगे तो मंडियों में आवक और कारोबार पर असर पड़ सकता है।

बागवानों ने उठाई बेहतर कीमत की मांग

सेब उत्पादकों का कहना है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।

खाद, दवाइयां, मजदूरी, पैकेजिंग और परिवहन खर्च बढ़ने के कारण उन्हें बेहतर कीमत मिलना जरूरी है।

बागवानों का कहना है कि कम खरीद रेट से उनकी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होंगी।

उन्होंने मांग की है कि कंपनियां बाजार की वास्तविक स्थिति के अनुसार खरीद मूल्य तय करें।

गुणवत्ता के आधार पर तय होते हैं रेट

सेब कारोबार में गुणवत्ता, आकार और किस्म के आधार पर कीमतों में अंतर होता है।

प्रीमियम गुणवत्ता वाले सेब की मांग अधिक होती है और इसके लिए बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है।

ऐसे में बागवानों का कहना है कि प्रीमियम सेब के लिए घोषित कंपनी रेट बाजार भाव के अनुरूप होना चाहिए।

आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर

फिलहाल सेब सीजन के दौरान खरीद प्रक्रिया जारी है।

आने वाले दिनों में मंडियों और कंपनियों के खरीद रेट में क्या बदलाव होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

बागवानों को उम्मीद है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा।

सेब अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण

हिमाचल प्रदेश में सेब कारोबार हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।

बागवानों की आय काफी हद तक सेब की कीमतों पर निर्भर करती है।

ऐसे में खरीद रेट में मामूली बदलाव भी उनके आर्थिक हालात पर बड़ा असर डाल सकता है।

अदाणी समूह के खरीद रेट को लेकर उठी चिंता के बीच अब बागवानों और कारोबारियों की नजर आगे की बाजार स्थिति पर टिकी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सेब की कीमतों में संतुलन बनेगा और उत्पादकों को राहत मिलेगी।

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