- Home
- /
- राज्य
- /
- हिमाचल प्रदेश
- /
- पहले नवरात्र पर बाबा...
पहले नवरात्र पर बाबा बालक नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 10 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के विश्वविख्यात सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। रविवार को करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा बालक नाथ के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दिनभर जारी रहा। भक्तों ने कतारों में लगकर बाबा के दर्शन किए और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पहले नवरात्र के अवसर पर मंदिर में धार्मिक परंपराओं का भी निर्वहन किया गया। इस दौरान शिवबाड़ी से विधि के अनुसार कलश लाया गया।
बाबा बालक नाथ मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन धार्मिक उत्साह का माहौल रहा। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल दियोटसिद्ध में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए कतारें लगी रहीं। भक्तों ने अपनी बारी आने पर बाबा के दर्शन किए। वहीं, नवरात्रि से जुड़ी धार्मिक परंपरा के तहत शिवबाड़ी से कलश लाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
पहले नवरात्र पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
दियोटसिद्ध स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में रविवार को नवरात्रि के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
सुबह से ही मंदिर में दर्शन करने वालों की आवाजाही शुरू हो गई थी। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं का आना जारी रहा।
जानकारी के अनुसार, रविवार को करीब 10 हजार भक्तों ने बाबा बालक नाथ के दर्शन किए।
मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति धार्मिक आस्था और उत्साह को दर्शाती है।
हालांकि, दिन के अलग-अलग समय में कितने श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, इसका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
कतारों में लगकर किए बाबा के दर्शन
बाबा बालक नाथ मंदिर में रविवार को दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं।
भक्त अपनी बारी का इंतजार करते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचे।
दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
सुबह से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला दिनभर जारी रहा।
मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण दर्शन व्यवस्था का महत्व भी बढ़ गया।
हालांकि, श्रद्धालुओं के लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था, कतार प्रबंधन और अन्य सुविधाओं का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
शिवबाड़ी से लाया गया पवित्र कलश
नवरात्रि के पहले दिन बाबा बालक नाथ मंदिर में धार्मिक परंपरा के अनुसार शिवबाड़ी से कलश लाया गया।
यह परंपरा नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में आयोजित धार्मिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जानकारी के अनुसार, शिवबाड़ी बाबा बालक नाथ मंदिर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित है।
पहले नवरात्र के अवसर पर इसी स्थान से कलश लेकर मंदिर पहुंचने की परंपरा निभाई गई।
इस दौरान प्रशासनिक और मंदिर प्रबंधन से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।
हालांकि, कलश लाने से पहले शिवबाड़ी में संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठानों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
एसडीएम स्वाति डोगरा और मंदिर अधिकारी रहे मौजूद
शिवबाड़ी से कलश लाने की धार्मिक परंपरा में एसडीएम स्वाति डोगरा और मंदिर अधिकारी राजेश कुमार ने भाग लिया।
दोनों अधिकारी शिवबाड़ी से कलश लेकर बाबा बालक नाथ के दरबार पहुंचे।
इस प्रकार नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में निर्धारित धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया गया।
शिवबाड़ी से दियोटसिद्ध मंदिर की दूरी करीब आठ किलोमीटर बताई गई है।
इस दूरी को तय करते हुए कलश मंदिर तक लाया गया।
हालांकि, कलश यात्रा किस समय शुरू हुई और मंदिर में किस समय पहुंची, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा यात्रा में अन्य कितने लोग शामिल थे, इसका विवरण भी सामने नहीं आया है।
विश्वविख्यात सिद्धपीठ है दियोटसिद्ध
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।
यह मंदिर बाबा बालक नाथ के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
यहां विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं।
नवरात्रि जैसे धार्मिक अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है।
रविवार को पहले नवरात्र के अवसर पर करीब 10 हजार श्रद्धालुओं का पहुंचना इसी आस्था को दर्शाता है।
मंदिर में भक्तों ने बाबा के दर्शन कर अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
सुबह से दिनभर जारी रहा दर्शन का सिलसिला
रविवार सुबह से ही बाबा बालक नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था।
दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु कतारों में लगकर दर्शन करते रहे।
नवरात्रि के पहले दिन बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने से मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं।
श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
हालांकि, रविवार को दर्शन की व्यवस्था कितने बजे तक संचालित हुई, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा आगामी नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं की संभावित संख्या का कोई आधिकारिक अनुमान भी सामने नहीं आया है।
परिवार की सुख-समृद्धि की कामना
बाबा बालक नाथ के दरबार में पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्त बाबा बालक नाथ के दर्शन को विशेष महत्व देते हैं।
नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना और दर्शन करने की परंपरा रही है।
इसी क्रम में रविवार को दियोटसिद्ध मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
भक्तों ने कतारों में लगकर दर्शन किए और बाबा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
इस दौरान मंदिर में शिवबाड़ी से कलश लाने की परंपरा भी पूरी की गई।
धार्मिक परंपरा के साथ नवरात्रि की शुरुआत
बाबा बालक नाथ मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के साथ धार्मिक परंपरा का भी पालन किया गया।
शिवबाड़ी से कलश लाकर बाबा के दरबार में पहुंचाया गया।
इस परंपरा में एसडीएम स्वाति डोगरा और मंदिर अधिकारी राजेश कुमार शामिल रहे।
दोनों अधिकारी करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित शिवबाड़ी से कलश लेकर मंदिर पहुंचे।
मंदिर में इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन नवरात्रि के पहले दिन किया गया।
हालांकि, नवरात्रि के शेष दिनों के लिए निर्धारित धार्मिक कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
10 हजार श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
दियोटसिद्ध स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
सुबह से दिनभर भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
श्रद्धालुओं ने कतारों में लगकर बाबा के दरबार में माथा टेका और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके साथ ही मंदिर में शिवबाड़ी से कलश लाने की धार्मिक परंपरा निभाई गई।
एसडीएम स्वाति डोगरा और मंदिर अधिकारी राजेश कुमार करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित शिवबाड़ी से कलश लेकर बाबा बालक नाथ के दरबार पहुंचे। इस तरह नवरात्रि के पहले दिन दियोटसिद्ध मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति और धार्मिक परंपराओं के बीच पूजा-दर्शन का सिलसिला जारी रहा।





