हिमाचल प्रदेश

नाहन में 7 बेसहारा पशुओं का रेस्क्यू, तीन निकले पालतू

Kavita2
3 Oct 2026 5:38 PM IST
नाहन में 7 बेसहारा पशुओं का रेस्क्यू, तीन निकले पालतू
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नाहन। सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन में सड़कों पर बेसहारा घूम रहे पशुओं को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को नगर परिषद क्षेत्र में अभियान चलाकर सात पशुओं को रेस्क्यू किया गया। इनमें से तीन पशु पालतू पाए गए, जिनकी पहचान उनके कानों में लगे टैग से हुई। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम नाहन ने संबंधित पशु मालिकों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश पुलिस थाना प्रभारी नाहन को दिए हैं।

रेस्क्यू किए गए पशुओं को पच्छाद उपमंडल के कोटला बरोग स्थित गौशाला में भेज दिया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य शहर की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं की समस्या को नियंत्रित करने के साथ ऐसे पशुपालकों की पहचान करना है, जो अपने पालतू पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं।

शनिवार को एसडीएम नाहन राजीव संख्या के नेतृत्व में नगर परिषद क्षेत्र में अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में घूम रहे कुल सात पशुओं को पकड़ा गया।

कान में लगे टैग से हुई पहचान

रेस्क्यू अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम ने पशुओं की पहचान के लिए उनके कानों में लगे टैग की जांच की। सात पशुओं में से तीन के टैग के आधार पर उनके मालिकों की पहचान हो गई।

जानकारी के मुताबिक इनमें नौणी का बाग के रमेश चंद्र और रजत सैनी तथा नाहन शहर के वार्ड नंबर 13 के राजकुमार के पशु शामिल पाए गए।

टैग लगे होने के कारण यह स्पष्ट हुआ कि ये पशु बेसहारा नहीं थे, बल्कि इनके मालिक मौजूद हैं। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई के निर्देश

तीन पालतू पशुओं के खुले में घूमते पाए जाने के बाद एसडीएम ने पुलिस थाना प्रभारी नाहन को संबंधित मालिकों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन का मानना है कि पालतू पशुओं को सड़कों पर छोड़ने से न केवल पशुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का जोखिम पैदा होता है।

शहर की व्यस्त सड़कों पर अचानक पशु आ जाने से यातायात बाधित होने के साथ सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रशासन अब पशुओं को खुले में छोड़ने वाले मालिकों की पहचान कर कार्रवाई करने पर जोर दे रहा है।

सात पशुओं को गौशाला भेजा

अभियान में पकड़े गए सभी सात पशुओं को नाहन शहर से निकालकर पच्छाद उपमंडल के कोटला बरोग स्थित गौशाला में भेजा गया है।

गौशाला में इन पशुओं की देखभाल की व्यवस्था की जाएगी। इससे शहर की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रशासन की ओर से रेस्क्यू अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि पशुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़कर गौशाला तक पहुंचाया जाए।

सड़कों पर पशुओं से दुर्घटना का खतरा

नाहन में बेसहारा पशुओं का सड़कों पर घूमना स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर रात के समय सड़क पर बैठे या घूमते पशु वाहन चालकों को समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

कई बार पशु मुख्य सड़क के बीच पहुंच जाते हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। छोटे वाहनों और दोपहिया चालकों के लिए ऐसी स्थिति ज्यादा जोखिम वाली हो सकती है।

इसके अलावा बाजार और रिहायशी इलाकों में घूमने वाले पशु कूड़े में भोजन तलाशते हुए भी दिखाई देते हैं। इससे स्वच्छता व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

पालतू पशुओं को खुले में छोड़ना बना चिंता

शनिवार की कार्रवाई में तीन पशुओं का पालतू पाया जाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मामला है। टैग के जरिए मालिकों की पहचान होने से यह पता चला कि पशुओं को रखने वाले लोग मौजूद होने के बावजूद वे शहर की सड़कों पर घूम रहे थे।

प्रशासन अब इस तरह के मामलों में सख्ती का संदेश देना चाहता है। पशुपालकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने पशुओं की उचित देखभाल करें और उन्हें सार्वजनिक स्थानों या सड़कों पर बेसहारा न छोड़ें।

पशुओं को खुले में छोड़ने से उनके भोजन, पानी और सुरक्षा को लेकर भी समस्या पैदा होती है। सड़क दुर्घटना में पशु स्वयं भी घायल हो सकते हैं।

टैगिंग से मालिकों तक पहुंचना हुआ आसान

पशुओं के कानों में लगे टैग इस अभियान में काफी उपयोगी साबित हुए। टैग की मदद से तीन पशुओं के मालिकों का पता लगाया गया।

पशुओं की टैगिंग का एक उद्देश्य उनकी पहचान सुनिश्चित करना भी है। अगर टैग लगा कोई पशु सड़क पर बेसहारा घूमता मिलता है तो प्रशासन के लिए उसके मालिक तक पहुंचना आसान हो जाता है।

नाहन में शनिवार को हुई कार्रवाई इसका उदाहरण बनी, जहां टैग के आधार पर तीन अलग-अलग पशु मालिकों की पहचान कर ली गई।

अभियान से पशुपालकों को सख्त संदेश

प्रशासन की कार्रवाई को उन पशुपालकों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है जो अपने पालतू पशुओं को खुले में छोड़ देते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

इस अभियान का मकसद केवल पशुओं को सड़क से हटाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पालतू पशुओं की जिम्मेदारी उनके मालिक निभाएं।

यदि पशुपालक अपने पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं तो प्रशासन टैग या अन्य माध्यमों से उनकी पहचान कर सकता है।

आगे भी कार्रवाई की जरूरत

शहर को बेसहारा पशुओं की समस्या से मुक्त रखने के लिए नियमित अभियान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके साथ पशुपालकों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी है।

शनिवार को सात पशुओं के रेस्क्यू और उनमें से तीन के मालिकों की पहचान के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया है।

फिलहाल सभी सात पशुओं को कोटला बरोग स्थित गौशाला भेज दिया गया है। वहीं नौणी का बाग के रमेश चंद्र, रजत सैनी और नाहन के वार्ड नंबर 13 के राजकुमार के पशुओं की टैग के आधार पर पहचान होने के बाद संबंधित मालिकों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश भी दिया गया है कि पालतू पशुओं को सड़कों पर बेसहारा छोड़ने वालों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

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