हिमाचल प्रदेश

660 मेगावाट की किशाऊ परियोजना को मिलेगी गति, अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक

Kavita2
13 Sept 2026 5:17 PM IST
660 मेगावाट की किशाऊ परियोजना को मिलेगी गति, अमित शाह की अध्यक्षता में अहम बैठक
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नई दिल्ली/शिमला: देश की महत्वपूर्ण किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण की दिशा में 15 सितंबर को एक अहम कदम उठाया जाएगा। ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित 660 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और राजस्थान के प्रतिनिधि शामिल होकर परियोजना से संबंधित करार पर हस्ताक्षर करेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार समझौता हस्ताक्षर समारोह 15 सितंबर को दोपहर 12 बजे से एक बजे तक कर्तव्य भवन-03, जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस बैठक को परियोजना के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छह राज्यों की भागीदारी वाली इस परियोजना में जल बंटवारे, बिजली उत्पादन, राज्यों की जिम्मेदारियों और निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आपसी सहमति आवश्यक है। प्रस्तावित करार से परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्यों के बीच समन्वय का औपचारिक आधार तैयार होने की उम्मीद है।

हिमाचल प्रदेश की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं विद्युत, गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत और सतर्कता आरडी नजीम बैठक में भाग लेंगे। वह समझौता वार्ता के दौरान परियोजना में हिमाचल प्रदेश के हितों, जिम्मेदारियों और संभावित भूमिका को लेकर राज्य सरकार का पक्ष रखेंगे। हिमाचल के लिए यह परियोजना ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास और प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रदेश सरकार समझौते की शर्तों में अपने हितों को पर्याप्त स्थान दिलाने का प्रयास करेगी।

किशाऊ परियोजना ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित है और इसे बहुउद्देशीय स्वरूप दिया गया है। परियोजना की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 660 मेगावाट प्रस्तावित है। इसके माध्यम से एक ओर जलविद्युत उत्पादन की योजना है, वहीं दूसरी ओर ऊपरी यमुना क्षेत्र के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और संबंधित राज्यों की पानी की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी काम किया जाना है। यही कारण है कि इस परियोजना में पहाड़ी राज्यों के साथ उत्तर भारत के कई मैदानी राज्यों की भी भागीदारी है।

परियोजना से जुड़े राज्यों की आवश्यकताएं और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए बिजली उत्पादन, परियोजना क्षेत्र का विकास और स्थानीय हित महत्वपूर्ण हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के लिए पानी की उपलब्धता बड़ा विषय है। इस कारण समझौते में सभी भागीदार राज्यों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक होगा। केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक से राज्यों के बीच लंबित विषयों पर सहमति बनाने और परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

जल संसाधनों से जुड़ी अंतरराज्यीय परियोजनाओं को लागू करने में अक्सर कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता पड़ती है। परियोजना की लागत, पानी और बिजली में हिस्सेदारी, भूमि की जरूरत, पर्यावरणीय प्रक्रिया, पुनर्वास तथा निर्माण से संबंधित जिम्मेदारियों पर स्पष्ट व्यवस्था बनाना जरूरी होता है। किशाऊ परियोजना में भी संबंधित राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण रहेगा। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इन विषयों पर आगे की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधि बैठक में विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि परियोजना के कारण प्रदेश को होने वाले लाभ, स्थानीय क्षेत्रों के विकास और राज्य की जिम्मेदारियों को करार में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। परियोजना का प्रभाव केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके निर्माण से आसपास के क्षेत्रों में सड़क, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास की संभावना भी बन सकती है। हालांकि इसके साथ भूमि, पर्यावरण और प्रभावित परिवारों से जुड़े विषयों का संवेदनशील तरीके से समाधान करना भी जरूरी होगा।

किशाऊ जैसी बहुउद्देशीय परियोजनाएं बढ़ती ऊर्जा और जल आवश्यकताओं के बीच महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। उत्तर भारत के कई हिस्सों में जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और कृषि गतिविधियों के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार भी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। जलविद्युत परियोजनाएं इन दोनों जरूरतों को एक साथ संबोधित करने की क्षमता रखती हैं, बशर्ते उनका निर्माण पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाए।

नई दिल्ली में होने वाला समझौता समारोह परियोजना से जुड़े राज्यों के बीच सहयोग की दिशा में बड़ा अवसर होगा। करार के बाद परियोजना के निर्माण की समयसीमा, वित्तीय व्यवस्था और तकनीकी कार्यों को लेकर आगे की रूपरेखा अधिक स्पष्ट होने की संभावना है। परियोजना के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए आवश्यक स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं को पूरा करना अगला महत्वपूर्ण चरण रहेगा।

फिलहाल सभी की नजर 15 सितंबर की बैठक पर टिकी है। यदि संबंधित राज्य प्रमुख विषयों पर साझा सहमति के साथ आगे बढ़ते हैं, तो लंबे समय से प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को निर्णायक गति मिल सकती है। यह समझौता ऊपरी यमुना बेसिन के जल संसाधनों के समन्वित उपयोग, ऊर्जा उत्पादन और छह राज्यों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

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