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Shimla शिमला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. यश पाल रांटा ने बुधवार को बताया कि इस साल मॉनसून शुरू होने के बाद से शिमला ज़िले में स्क्रब टाइफस के 24 मामले सामने आए हैं। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी क्योंकि स्क्रब टाइफस संक्रमित लार्वा माइट्स (एक तरह के छोटे कीड़े) के काटने से फैलता है, जो आमतौर पर झाड़ियों, घास, खेतों और घनी वनस्पति वाले इलाकों में पाए जाते हैं। उन्होंने कहा, "इसके आम लक्षणों में बुखार, तेज़ सिरदर्द, शरीर में दर्द, कंपकंपी, कमज़ोरी, रैशेज़ और लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हैं। कुछ मामलों में 'एस्चर' (eschar) नाम का गहरे रंग का घाव या पपड़ी जैसा निशान भी हो सकता है।"
CMO ने लोगों को सलाह दी कि वे घास या ज़मीन पर सीधे न बैठें और न लेटें; खेतों या घनी वनस्पति वाले इलाकों में काम करते समय पूरी आस्तीन के कपड़े, लंबी पतलून और बंद जूते पहनें; घर के आस-पास घास, खरपतवार और झाड़ियों को छोटा रखें; घर के अंदर और आस-पास साफ़-सफ़ाई बनाए रखें; खेतों या घनी वनस्पति में काम करने के बाद नहाएं और कपड़े धोएं; और खुद से दवा लेने से बचें तथा बुखार बने रहने पर डॉक्टर की सलाह लें।
उन्होंने कहा, "शुरुआत में पता चलने पर स्क्रब टाइफस का इलाज संभव है। अगर किसी को लगातार बुखार, तेज़ सिरदर्द, शरीर में दर्द या ऐसे ही दूसरे लक्षण महसूस हों, तो उन्हें बिना देरी किए नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र जाना चाहिए। ज़िले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रब टाइफस के इलाज के लिए दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।" CMO ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और उसने सभी चिकित्सा केंद्रों को निगरानी बनाए रखने तथा स्क्रब टाइफस के मामलों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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