हिमाचल प्रदेश

Mandi में 23,291 किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती

Ratna Netam
18 April 2026 5:44 PM IST
Mandi में 23,291 किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती
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Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: Mandi में प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों के बीच तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में 23,291 और किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है, जिससे इस क्षेत्र में कृषि के स्वरूप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
प्राकृतिक खेती (Natural Farming) एक ऐसी पद्धति है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय जैविक और पारंपरिक तरीकों से खेती की जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों की रक्षा होती है।
Mandi में किसानों द्वारा इस पद्धति को अपनाने के पीछे कई कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है और फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य भी मिल सकता है।
राज्य सरकार भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।
Himachal Pradesh के कृषि विभाग के अनुसार, जिले में लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि किसान अब पारंपरिक और टिकाऊ खेती की ओर लौट रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में सुधार होने की उम्मीद है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
किसानों का कहना है that natural farming अपनाने से उन्हें रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करनी पड़ी है, जिससे उनकी लागत में कमी आई है। साथ ही, मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है।
Mandi में कई सफल किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती से उनकी फसल की गुणवत्ता और बाजार में मांग दोनों बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर विकल्प है।
सरकार की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति को अपनाएं, ताकि कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
फिलहाल, Mandi में 23,291 किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने का यह आंकड़ा एक सकारात्मक संकेत है और यह दर्शाता है कि भविष्य में इस क्षेत्र में रसायन मुक्त खेती का दायरा और बढ़ सकता है।
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