Yamunanagar: यमुनानगर पुलिस अधिकारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

यमुनानगर: गंभीर आपराधिक मामलों की विवेचना को अधिक प्रभावी, साक्ष्य आधारित और न्यायिक कसौटी पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से यमुनानगर लघु सचिवालय के बैठक कक्ष में जांच अधिकारियों और लोक अभियोजकों की संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई।
संगोष्ठी में जांच प्रक्रिया की गुणवत्ता बढ़ाने, विधिक प्रावधानों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने तथा पुलिस एवं अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यशाला में अतिरिक्त जिला अटॉर्नी करण कपूर और अर्शदीप ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में जांच अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने आपराधिक मामलों की विवेचना के दौरान अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं, साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन और न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों की व्यावहारिक जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
संगोष्ठी में विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रत्येक कानूनी औपचारिकता का पूर्ण अनुपालन अत्यंत आवश्यक है, ताकि तकनीकी खामियों के कारण अभियोजन पक्ष कमजोर न पड़े व दोषियों को न्यायालय से प्रभावी दंड दिलाया जा सके।
बैठक के दौरान भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4)(सी) के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से संबंधित प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने और उन्हें न्यायालय में स्वीकार्य बनाने के लिए निर्धारित कानूनी मानकों का पालन अनिवार्य है। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से विभिन्न कानूनी विषयों पर सुझाव प्राप्त किए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम जांच अधिकारियों की पेशेवर दक्षता बढ़ाने, आधुनिक कानूनी प्रावधानों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा पुलिस और अभियोजन के बीच समन्वय को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





