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पूर्व IPS अधिकारी अशोक कुमार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को बताया है कि वे सोनीपत के राय में स्थित हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर के तौर पर काम जारी रखने की स्थिति में नहीं हैं। "निजी कारणों" से काम जारी न रखने की यह बात तब सामने आई जब उनकी नियुक्ति को "UGC नियमों के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन होने के कारण गैर-कानूनी और शुरू से ही अमान्य" घोषित करने की याचिका पर सुनवाई हो रही थी।
उनकी बातों पर ध्यान देते हुए, जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वे इस्तीफ़ा सौंपे जाने के एक हफ़्ते के भीतर उसे स्वीकार करें और इस बीच वाइस-चांसलर के कर्तव्यों को निभाने के लिए सबसे सीनियर डीन को नियुक्त करें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगले वाइस-चांसलर की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के हालिया फ़ैसले को ध्यान में रखते हुए "UGC नियम, 2018 का सख्ती से पालन करते हुए" की जाए।
जस्टिस बरार ने डॉ. देवेंद्र सिंह मोर और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा कुमार की वाइस-चांसलर के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए ये निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से वकील श्रीनाथ ए. खेमका और देवराज असाटी पेश हुए। जब मामला जस्टिस बरार की बेंच के सामने आया, तो कुमार की ओर से पेश वकील श्रुति जैन गोयल ने कहा: "प्रतिवादी निजी कारणों से यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर के तौर पर काम जारी रखने की स्थिति में नहीं है"। वकील ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रतिवादी तीन हफ़्ते के भीतर अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे और तुरंत चार्ज सौंप देंगे।
सरकार को एक हफ़्ते के भीतर इस्तीफ़ा स्वीकार करने का निर्देश
बयान पर ध्यान देते हुए, जस्टिस बरार ने अपने विस्तृत आदेश में निर्देश दिया: "प्रतिवादी के वकील द्वारा दिए गए बयान को देखते हुए, मौजूदा याचिका का निपटारा किया जाता है और राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह प्रतिवादी का इस्तीफ़ा सौंपे जाने की तारीख से एक हफ़्ते के भीतर स्वीकार करे।" कोर्ट ने इस्तीफ़े के बाद अपनाई जाने वाली व्यवस्था के बारे में भी बताया है। बेंच ने कहा, "राज्य सरकार को यूनिवर्सिटी के नियमों के नियम 2 में बताई गई प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, खासकर नियम 2 के उस प्रावधान का जो वाइस-चांसलर के इस्तीफे के कारण खाली हुए पद से संबंधित है। साथ ही, जब तक वाइस-चांसलर के पद पर नई नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक अंतरिम अवधि के लिए सबसे सीनियर डीन को वाइस-चांसलर के कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त करना चाहिए।"
जस्टिस बरार ने ज़रूरी कदम उठाने के लिए 31 अक्टूबर की समय-सीमा भी तय की। जस्टिस बरार ने निर्देश दिया, "यह स्पष्ट किया जाता है कि सभी ज़रूरी कदम - जिनमें प्रतिवादी का इस्तीफा स्वीकार करना, अंतरिम व्यवस्था करना और अगले वाइस-चांसलर की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करना शामिल है - 31 अक्टूबर या उससे पहले पूरे कर लिए जाने चाहिए।" आदेश समाप्त करने से पहले, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बहुमूल्य सहायता प्रदान करने के लिए एमिकस क्यूरी नवदीप छाबड़ा का आभार व्यक्त किया।
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