हरियाणा

हरियाणा कांग्रेस में संगठन विस्तार पर घमासान

Kavita2
10 Aug 2026 5:11 PM IST
हरियाणा कांग्रेस में संगठन विस्तार पर घमासान
x

चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में मंडल से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद अब अंदरूनी असंतोष के कारण चुनौती बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश में संगठनात्मक ढांचे को सक्रिय करने के उद्देश्य से ब्लॉक स्तर पर अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन पार्टी नेताओं को ब्लॉक अध्यक्ष तय करने में ही काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पहली सूची जारी होने के बाद जहां पार्टी के भीतर स्थिति अपेक्षाकृत शांत रही, वहीं करीब डेढ़ महीने बाद जारी हुई दूसरी सूची ने कई जिलाध्यक्षों की नाराजगी बढ़ा दी है।

कांग्रेस संगठन के लिए ब्लॉक अध्यक्षों का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही पदाधिकारी जिला संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं। ऐसे में नियुक्तियों को लेकर उठे मतभेद का असर पार्टी की आगामी संगठनात्मक गतिविधियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

पहली सूची के बाद शांत था माहौल

हरियाणा कांग्रेस ने संगठन विस्तार की प्रक्रिया के तहत ब्लॉक अध्यक्षों की पहली सूची जारी की थी। पहली सूची सामने आने के बाद पार्टी के भीतर कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की दिशा में कदम माना।

लेकिन दूसरी सूची जारी होने में करीब डेढ़ महीने का समय लग गया। इस लंबी अवधि के बाद जब दूसरी सूची सामने आई तो पार्टी के कई जिलाध्यक्षों की नाराजगी सामने आने लगी। कुछ नेताओं ने नियुक्तियों की प्रक्रिया और चयन को लेकर सवाल उठाए हैं।

जिलाध्यक्षों की नाराजगी ने बढ़ाई चिंता

दूसरी सूची के बाद जिन जिलाध्यक्षों में असंतोष बताया जा रहा है, उनकी मुख्य चिंता संगठनात्मक अधिकार और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी है। जिलाध्यक्षों का मानना है कि ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति में स्थानीय संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में ब्लॉक अध्यक्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे अपने क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों, सदस्यता अभियान, बूथ स्तर की तैयारियों और चुनावी रणनीति को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि जिला स्तर पर ही नियुक्तियों को लेकर असहमति हो तो आगे संगठन के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

मंडल से बूथ तक संगठन मजबूत करने की कोशिश

कांग्रेस की मौजूदा कवायद का उद्देश्य पार्टी संगठन को मंडल से लेकर बूथ स्तर तक सक्रिय करना है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति और कार्यकारिणी के गठन पर जोर दिया जा रहा है।

पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संगठन का ढांचा केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि कार्यकर्ता नियमित रूप से जनता के बीच सक्रिय रहें। इसके लिए ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर पर मजबूत टीम तैयार करना जरूरी माना जा रहा है।

ब्लॉक अध्यक्ष इस पूरी व्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। इसलिए इन पदों पर नियुक्तियों को लेकर पार्टी के भीतर व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

नियुक्तियों में देरी से भी उठे सवाल

दूसरी सूची जारी होने में करीब डेढ़ महीने का समय लगने को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा है। संगठन विस्तार की प्रक्रिया में लगातार देरी होने से कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बन सकती है।

पार्टी नेताओं के सामने चुनौती यह है कि संगठन का विस्तार जल्द पूरा किया जाए और साथ ही सभी गुटों को साथ लेकर चलने की कोशिश भी हो। हरियाणा कांग्रेस में अलग-अलग स्तर पर नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए नियुक्तियों में संतुलन बनाना आसान नहीं माना जा रहा है।

स्थानीय समीकरण भी अहम

ब्लॉक अध्यक्षों के चयन में स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र हैं। ऐसे में किसी एक नेता के समर्थक को जिम्मेदारी मिलने पर दूसरे गुट के कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा होने की संभावना रहती है।

जिलाध्यक्षों की नाराजगी को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। संगठन के वरिष्ठ नेताओं के सामने अब यह चुनौती है कि नियुक्तियों को लेकर पैदा हुए मतभेदों को कैसे दूर किया जाए और सभी नेताओं को साथ लेकर संगठन विस्तार को आगे बढ़ाया जाए।

बूथ स्तर पर असर पड़ने की आशंका

कांग्रेस का लक्ष्य आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिए बूथ स्तर तक मजबूत संगठन तैयार करना है। यदि ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर विवाद लंबा खिंचता है तो इसका असर नीचे के स्तर पर भी पड़ सकता है।

ब्लॉक अध्यक्षों के जरिए ही बूथ समितियों, स्थानीय कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं के समन्वय का काम आगे बढ़ाया जाना है। इसलिए पार्टी के लिए जरूरी है कि नियुक्तियों पर जल्द सहमति बने और संगठनात्मक गतिविधियां गति पकड़ें।

नेतृत्व के सामने संतुलन की चुनौती

दूसरी सूची के बाद सामने आई नाराजगी ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी को एक ओर संगठनात्मक विस्तार तेजी से पूरा करना है, वहीं दूसरी ओर नियुक्तियों से नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी साथ रखना है।

यदि असंतोष बढ़ता है तो इसका असर पार्टी के सार्वजनिक कार्यक्रमों और जमीनी गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

आगे की सूची पर भी नजर

अब पार्टी के भीतर अगली नियुक्तियों को लेकर भी उत्सुकता है। कार्यकर्ताओं और नेताओं की नजर इस बात पर है कि आगे आने वाली सूचियों में चयन की प्रक्रिया किस तरह अपनाई जाती है और क्या स्थानीय नेताओं की राय को अधिक महत्व दिया जाता है।

हरियाणा कांग्रेस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की है। मंडल से बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब पदाधिकारियों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर व्यापक सहमति बने।

पहली सूची के बाद शांत रहा माहौल दूसरी सूची के बाद बदला है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व जिलाध्यक्षों की नाराजगी को कैसे दूर करता है और संगठन विस्तार की प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाता है।

Next Story