हरियाणा

पराली जलाने वालों की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने अधिकारियों को थमाया नोटिस

Rajeshwari Nishad
8 Nov 2026 2:38 PM IST
पराली जलाने वालों की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने अधिकारियों को थमाया नोटिस
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चंडीगढ़। हरियाणा में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण की बढ़ती चिंता के बीच पराली जलाने की घटनाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। प्रदेश में इस बार पराली जलाने से जुड़ी आग की घटनाओं की संख्या बढ़कर 89 हो गई है। इनमें से 77 मामलों की जांच पूरी कर ली गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
हरियाणा में हर साल धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों के निपटान का मुद्दा सामने आता है। कई स्थानों पर किसान खेतों को अगली फसल के लिए जल्दी तैयार करने के उद्देश्य से पराली जलाते हैं। इससे निकलने वाला धुआं वातावरण में प्रदूषण बढ़ाने का कारण बन सकता है। विशेष रूप से सर्दियों की शुरुआत में हवा की गति कम होने और अन्य मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है।
पराली जलाने की 89 घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हरियाणा में पराली जलाने से संबंधित आग की घटनाओं की संख्या 89 तक पहुंचने के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित स्तर पर जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 77 मामलों की जांच पूरी की जा चुकी है।हालांकि, जांच पूरी होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी मामलों में पराली जलाने की पुष्टि हुई है। आग लगने की घटनाओं के वास्तविक कारण और संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।सरकार का उद्देश्य ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना है, ताकि खेतों में आग लगने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सके। प्रशासन के लिए यह भी जरूरी है कि जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाए, उनमें निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई हो।
पराली जलाने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
राज्य सरकार ने पराली जलाने के मामलों में सख्ती बरतने का संकेत दिया है। यदि कोई व्यक्ति खेतों में पराली जलाते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।पराली जलाने पर रोक लगाने के पीछे मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना है। खेतों में फसल अवशेष जलाने से धुआं और सूक्ष्म कण वातावरण में फैलते हैं, जो हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रशासनिक निगरानी के साथ किसानों में जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक माना जाता है। केवल कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि किसानों को पराली प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
दिवाली के दौरान प्रदूषण को लेकर बढ़ी सतर्कता
दिवाली के आसपास वायु प्रदूषण का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा में रहता है। इस दौरान मौसम में बदलाव, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक गतिविधियां और अन्य प्रदूषणकारी स्रोत हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।ऐसे समय में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण की समस्या को और बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर सख्ती दिखाने का फैसला किया है।वायु प्रदूषण का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए प्रदूषित हवा अधिक परेशानी पैदा कर सकती है।
किसानों के सामने भी पराली प्रबंधन की चुनौती
धान की कटाई के बाद किसानों के सामने खेतों में बचे अवशेषों को हटाने की चुनौती होती है। कई बार अगली फसल की बुवाई के लिए समय कम होने के कारण पराली का निपटान मुश्किल हो जाता है।पराली को जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। कृषि अवशेषों को मशीनों की सहायता से खेत में मिलाया जा सकता है। इसके अलावा पराली का उपयोग जैविक खाद, बायोमास और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने में भी किया जा सकता है।हालांकि, इन विकल्पों को अपनाने में किसानों को मशीनों की उपलब्धता, खर्च और समय जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों के साथ किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को समझना भी जरूरी है।
पराली जलाने से पर्यावरण को होता है नुकसान
विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में पराली जलाने से वातावरण में धुआं, कार्बन मोनोऑक्साइड और सूक्ष्म प्रदूषक कण फैल सकते हैं। इससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।पराली जलाने का असर मिट्टी पर भी पड़ता है। आग की अधिक गर्मी से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा फसल अवशेषों में मौजूद उपयोगी पोषक तत्वों का नुकसान भी हो सकता है।इसी कारण कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करना पर्यावरण और खेती दोनों के लिए बेहतर माना जाता है।
77 मामलों की जांच पूरी, बाकी पर नजर
हरियाणा में सामने आई 89 आग की घटनाओं में से 77 मामलों की जांच पूरी होने के बाद अब शेष मामलों की जांच महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 12 मामलों की जांच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।जांच के निष्कर्षों के आधार पर यह तय होगा कि किन घटनाओं में पराली जलाने से संबंधित नियमों का उल्लंघन हुआ है और कहां कार्रवाई आवश्यक है।राज्य सरकार की सख्ती से यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों को लेकर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रशासन, किसानों और आम नागरिकों के सहयोग की भी जरूरत होगी।हरियाणा में पराली जलाने से जुड़ी 89 घटनाओं का सामने आना और 77 मामलों की जांच पूरी होना इस बात को दर्शाता है कि यह मुद्दा प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। अब देखना होगा कि सरकार की सख्ती और पराली प्रबंधन के प्रयासों से आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं में कितनी कमी आती है।
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