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दिल्ली-आगरा हाईवे पर सफर होगा और तेज कारपेटिंग का काम मध्य चरण में पहुंचा

Kavita2
11 Sept 2026 12:49 PM IST
दिल्ली-आगरा हाईवे पर सफर होगा और तेज कारपेटिंग का काम मध्य चरण में पहुंचा
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फरीदाबाद। दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन चालकों को जल्द बेहतर और आरामदायक सफर मिलने की उम्मीद है। गदपुरी टोल बैरियर से सराय ख्वाजा टोल बैरियर तक सड़क की नई कारपेटिंग का काम तेजी से चल रहा है। परियोजना अब मध्य चरण में पहुंच चुकी है। पहले फरीदाबाद से दिल्ली की दिशा वाली सड़क पर काम पूरा किया जा रहा है। इसके बाद दूसरी दिशा में कारपेटिंग शुरू की जाएगी।

संबंधित एजेंसियों ने फरीदाबाद से दिल्ली की ओर चल रहे कारपेटिंग कार्य को अगले तीन से चार दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। निर्धारित समय में काम पूरा होने के बाद दिल्ली से फरीदाबाद की ओर आने वाली सड़क की सतह को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। दोनों दिशाओं में काम पूरा होने पर वाहन चालकों को गड्ढों और असमान सतह से राहत मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली-आगरा राजमार्ग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। रोजाना बड़ी संख्या में कार, बस, ट्रक और दूसरे वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं। भारी यातायात के कारण सड़क की ऊपरी परत समय के साथ क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऐसे में सुरक्षित और सुगम यातायात बनाए रखने के लिए समय-समय पर कारपेटिंग आवश्यक होती है।

नई कारपेटिंग के दौरान सड़क की पुरानी और क्षतिग्रस्त सतह की मरम्मत करके उस पर नई परत बिछाई जा रही है। इससे सड़क की पकड़ और समतलता बेहतर होगी। विशेष रूप से तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए सड़क की सतह का समान होना जरूरी है क्योंकि अचानक मिलने वाले गड्ढे या ऊंचे-नीचे हिस्से दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

गदपुरी टोल बैरियर से सराय ख्वाजा टोल बैरियर के बीच का हिस्सा फरीदाबाद और दिल्ली के बीच दैनिक यात्रा करने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी, कारोबारी और औद्योगिक वाहनों के चालक इस मार्ग का उपयोग करते हैं। सड़क की नई परत तैयार होने से उनके यात्रा समय और वाहन संचालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कारपेटिंग का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है ताकि हाईवे पर यातायात पूरी तरह बंद न करना पड़े। पहले एक दिशा में काम पूरा किया जा रहा है और इसके बाद दूसरी दिशा को लिया जाएगा। इस व्यवस्था से वाहन चलते रहेंगे लेकिन निर्माण वाले हिस्सों में अस्थायी जाम या धीमी गति की स्थिति बन सकती है।

वाहन चालकों को निर्माण स्थल के पास गति कम रखने और लगाए गए संकेतकों का पालन करने की आवश्यकता है। सड़क पर काम करने वाली मशीनों और कर्मचारियों की मौजूदगी के कारण लेन में बदलाव किया जा सकता है। रात के समय निर्माण क्षेत्र से गुजरते हुए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि भारी मशीनों और बैरिकेड के कारण सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो सकती है।

दिल्ली से आगरा तक के मार्ग को सिग्नल फ्री कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। कॉरिडोर को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति क्षमता वाले तकनीकी मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। नई कारपेटिंग में भी हाईस्पीड यातायात की जरूरतों के अनुसार सड़क की गुणवत्ता और सतह पर ध्यान दिया जा रहा है।

हालांकि 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तकनीकी क्षमता का अर्थ यह नहीं है कि वाहन चालक हर हिस्से पर इसी गति से वाहन चला सकते हैं। वाहन की वास्तविक गति उस क्षेत्र के लिए अधिसूचित सीमा, यातायात की स्थिति, मौसम और सुरक्षा निर्देशों के अनुसार ही होनी चाहिए। जहां निर्माण कार्य चल रहा है वहां गति और भी कम रखना जरूरी है।

सिग्नल फ्री कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान बार-बार रुकने की आवश्यकता को कम करना है। चौराहों और कट पर यातायात का निर्बाध संचालन होने से दिल्ली से आगरा तक यात्रा का समय घट सकता है। इससे निजी वाहन चालकों के साथ सार्वजनिक परिवहन और मालवाहक वाहनों को भी लाभ मिलेगा।

बेहतर सड़क सतह के कारण वाहनों की ईंधन खपत में भी कमी आ सकती है। गड्ढों और असमान सड़क पर बार-बार ब्रेक लगाने तथा गति बदलने से ईंधन अधिक खर्च होता है। समतल सड़क मिलने पर वाहन स्थिर गति से चल सकते हैं जिससे यात्रा अधिक आरामदायक होती है और वाहन के टायर तथा सस्पेंशन पर दबाव कम पड़ता है।

कारपेटिंग का काम पूरा होने के बाद सड़क पर लेन मार्किंग, दिशा संकेतक और अन्य सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होगी। हाईस्पीड मार्ग पर साफ दिखाई देने वाली लेन और चेतावनी संकेतक वाहन चालकों को सही दिशा बनाए रखने में मदद करते हैं। रात और खराब मौसम में रिफ्लेक्टिव मार्किंग की भूमिका और बढ़ जाती है।

दिल्ली और फरीदाबाद के बीच इस हिस्से पर सुबह और शाम के समय भारी यातायात रहता है। सड़क निर्माण के दौरान लेन कम होने से पीक आवर में वाहनों की लंबी कतार लग सकती है। एजेंसियों को कारपेटिंग के साथ यातायात प्रबंधन पर भी लगातार नजर रखनी होगी ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।

काम की गति बनाए रखने के लिए मौसम भी महत्वपूर्ण है। बारिश होने पर कारपेटिंग की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और काम रोकना पड़ सकता है। सड़क पर नई परत बिछाने के लिए सतह का सूखा और साफ होना जरूरी होता है। इसलिए अगले तीन से चार दिनों में काम पूरा करने का लक्ष्य मौसम और यातायात की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

कारपेटिंग के बाद सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण आवश्यक होगा। जिन स्थानों पर भारी वाहनों का दबाव ज्यादा है वहां सतह के जल्दी खराब होने की संभावना रहती है। जल निकासी सही नहीं होने पर बारिश का पानी सड़क पर जमा होकर नई परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए सड़क के साथ नालियों और जल निकासी व्यवस्था की निगरानी भी जरूरी होगी।

दिल्ली-आगरा राजमार्ग औद्योगिक और पर्यटन गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह मार्ग फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों को दिल्ली और उत्तर प्रदेश से जोड़ता है। वहीं आगरा जाने वाले पर्यटक भी बड़े पैमाने पर इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हैं। सुगम सड़क से माल परिवहन और पर्यटन दोनों को लाभ मिल सकता है।

फिलहाल फरीदाबाद से दिल्ली की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले तीन से चार दिनों में इस हिस्से की कारपेटिंग पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद दिल्ली से फरीदाबाद की ओर सड़क को संवारा जाएगा। दोनों दिशाओं में नई परत बिछने के बाद गदपुरी और सराय ख्वाजा के बीच वाहन चालकों को बेहतर सतह और सुगम यात्रा मिल सकेगी।

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