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हिसार : हरियाणा रोडवेज में गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर राज्य परिवहन निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। गबन के मामलों में शामिल ऐसे चालक और परिचालक, जिन्हें उनके मूल आगार यानी पुराने डिपो से हटाकर दूसरे आगारों में तैनात किया गया था, उन्हें अब वापस उनके मूल आगार में भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित गबन के मामलों का जल्द निपटारा करने और संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य परिवहन निदेशालय, हरियाणा की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। यह पत्र हरियाणा राज्य परिवहन के सभी महाप्रबंधकों के साथ आईएसबीटी दिल्ली में तैनात उड़नदस्ता अधिकारी को भी भेजा गया है। निदेशालय ने पत्र में परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से 25 मई 2026 को जारी आदेश का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से उस पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
जानकारी के मुताबिक, हरियाणा रोडवेज में गबन से जुड़े विभिन्न मामलों में कई चालक और परिचालक जांच के दायरे में आए थे। ऐसे कर्मचारियों को पहले उनके मूल आगारों से हटाकर दूसरे डिपो में भेज दिया गया था। अब परिवहन निदेशालय ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए इन कर्मचारियों को उनके पुराने यानी मूल आगारों में वापस भेजने का निर्देश दिया है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को कर्मचारियों की सूची और उनकी वर्तमान तैनाती की समीक्षा करनी होगी।
निदेशालय ने केवल कर्मचारियों को वापस भेजने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गबन से जुड़े लंबित मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। विभाग में ऐसे मामलों को लंबे समय तक लंबित रखने को लेकर निदेशालय ने गंभीरता दिखाई है। अब संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक मामले की स्थिति की समीक्षा कर जल्द से जल्द निर्णय लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
परिवहन निदेशालय के आदेश के बाद हरियाणा राज्य परिवहन के विभिन्न आगारों के महाप्रबंधकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें अपने-अपने डिपो से जुड़े गबन के मामलों का पूरा रिकॉर्ड खंगालना होगा। यह पता लगाया जाएगा कि किन कर्मचारियों के खिलाफ गबन के मामले चल रहे हैं, उन्हें वर्तमान में कहां तैनात किया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची है। इसके आधार पर कर्मचारियों को मूल आगार में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
साथ ही महाप्रबंधकों को लंबित मामलों का रिकॉर्ड तैयार कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। इससे उन मामलों की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी जो काफी समय से विभागीय स्तर पर लंबित हैं। निदेशालय का जोर इस बात पर है कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी न हो और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा जांच के आधार पर समय पर फैसला लिया जाए।
आदेश पत्र की एक प्रति हरियाणा राज्य परिवहन दिल्ली के महाप्रबंधक को भी भेजी गई है। इसके अलावा कुरुक्षेत्र के महाप्रबंधक के माध्यम से संबंधित अधिकारी तक निर्देश पहुंचाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इससे साफ है कि निदेशालय पूरे प्रदेश में एक समान तरीके से आदेश का पालन कराने की तैयारी में है।
हरियाणा रोडवेज में वित्तीय मामलों से जुड़े प्रकरण विभाग के लिए संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में गबन के आरोपों से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लंबित रखने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। निदेशालय के नए निर्देशों के बाद उम्मीद है कि इन मामलों की जांच और विभागीय कार्रवाई में तेजी आएगी। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के मामलों में भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब सभी संबंधित महाप्रबंधकों को कर्मचारियों की वर्तमान तैनाती और उनके खिलाफ लंबित मामलों की समीक्षा करनी होगी। दूसरे आगारों में तैनात गबन मामलों से जुड़े चालक-परिचालकों को मूल आगार में वापस भेजने के साथ उनके मामलों का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित किया जाएगा। इसके बाद लंबित मामलों में जल्द फैसला लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। परिवहन निदेशालय के इस कदम को हरियाणा रोडवेज में वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
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