हरियाणा

7 घंटे थमा ट्रैफिक 300 जवान तैनात ब्रेन डेड मरीज के अंगों से मिली नई जिंदगी

nidhi
18 Sept 2026 9:27 AM IST
7 घंटे थमा ट्रैफिक 300 जवान तैनात ब्रेन डेड मरीज के अंगों से मिली नई जिंदगी
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रोहतक से दिल्ली तक दौड़ी उम्मीद की राह

रोहतक : हरियाणा के रोहतक से दिल्ली तक एक बेहद संवेदनशील और मानवता से जुड़ा ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, ताकि एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंग समय पर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाए जा सकें। इस दौरान करीब 7 घंटे तक यातायात व्यवस्था को विशेष तरीके से नियंत्रित किया गया और करीब 300 जवानों की तैनाती की गई।

जानकारी के अनुसार, रोहतक के रहने वाले मुन्नादास को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया था। परिवार ने दुख की घड़ी में अंगदान का फैसला लेकर मानवता की मिसाल पेश की। उनके अंगों को सुरक्षित तरीके से दिल्ली के अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अंगों को कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है, ताकि प्रत्यारोपण की प्रक्रिया सफल हो सके। इस पूरे अभियान में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के अधिकारियों ने मिलकर काम किया।
300 जवानों ने संभाली जिम्मेदारी
अंगों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए रोहतक से दिल्ली तक के रास्ते पर विशेष ट्रैफिक प्लान बनाया गया। जगह-जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और रास्ते को खाली रखने के लिए लगातार निगरानी की गई। करीब 300 पुलिस जवानों ने ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था संभाली। ट्रैफिक को नियंत्रित करते हुए एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया गया।
चार मरीजों को मिला जीवन का मौका
मुन्नादास के अंगदान से चार गंभीर मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। अंग प्रत्यारोपण के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए प्रशासन ने पूरी तेजी के साथ यह व्यवस्था की। परिवार के इस फैसले की लोगों ने सराहना की है। कठिन समय में अंगदान का निर्णय लेकर उन्होंने कई परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगाई है।
अंगदान को लेकर बढ़ रही जागरूकता
भारत में पिछले कुछ वर्षों में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है। ब्रेन डेड मरीजों के अंगों का उपयोग जरूरतमंद लोगों के जीवन को बचाने में किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अंगदान के लिए परिवार की सहमति और समय पर प्रक्रिया पूरी करना बेहद जरूरी होता है। ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्थाएं इस प्रक्रिया को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। रोहतक से दिल्ली तक बना यह ग्रीन कॉरिडोर केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि इंसानियत और सहयोग की मिसाल भी बना, जहां एक व्यक्ति के अंगों ने चार लोगों को जीवन की नई उम्मीद दी।
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