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Haryana हरियाणा कांग्रेस ने सस्पेंड किए गए रतिया के MLA जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसमें पूछा गया है कि उन्हें अयोग्य ठहराने की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक बीबी बतरा ने 13 सितंबर को यह नोटिस जारी किया। इसमें आरोप लगाया गया है कि सिंह ने पार्टी के निर्देशों के खिलाफ काम किया और विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान सत्ताधारी बीजेपी के सदस्यों के साथ मिलकर कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए। जरनैल सिंह उन पांच कांग्रेस विधायकों में शामिल थे जिन्हें 16 अप्रैल को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था। इन विधायकों ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया था।
ताज़ा विवाद 27 अगस्त की कार्यवाही से जुड़ा है, जब कांग्रेस ने कथित तौर पर 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया था। बतरा ने सभी सस्पेंड किए गए विधायकों को सदन में मौजूद रहने और प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्देश दिया था। नोटिस के अनुसार, जहां कांग्रेस विधायक प्रस्ताव के समर्थन में खड़े थे, वहीं जरनैल सिंह ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़ा एक पोस्टर दिखाया और रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा को निशाना बनाया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि यह पोस्टर हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम ने उपलब्ध कराया था। नोटिस में आगे कहा गया है कि उपलब्ध फोटो और वीडियो से पता चलता है कि सिंह प्लेकार्ड लेकर ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष की सीटों) तक गए और सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों के साथ नारे लगाए। सिंह की मंत्री कृष्ण बेदी के साथ पोस्टर पकड़े हुए खड़े होने की एक तस्वीर भी साथ में लगाई गई थी।
रवि एस. नाइक बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1994 के फैसले का हवाला देते हुए नोटिस में कहा गया है कि औपचारिक इस्तीफे के बिना भी किसी विधायक के व्यवहार से पार्टी से स्वेच्छा से इस्तीफा देने का अनुमान लगाया जा सकता है। जरनैल सिंह को अपना जवाब देने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
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