हरियाणा

‘पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ी’

Kiran
7 Oct 2026 1:32 PM IST
‘पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ी’
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे कर रहे हैं—यह एक ऐसा सार्वजनिक सफर है जो 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के साथ शुरू हुआ और 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के साथ आगे बढ़ा। इस दौरान भारत में बड़े आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे और सामाजिक बदलाव हुए हैं। मोदी सरकार ने बड़े पैमाने पर काम करने, टेक्नोलॉजी, बुनियादी ढांचे, वित्तीय समावेश, मैन्युफैक्चरिंग, सामाजिक कल्याण और ग्लोबल इकॉनमी के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी पर केंद्रित अप्रोच अपनाई है।
इस बदलाव की एक खास बात डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार रही है। 2015 में शुरू किए गए 'डिजिटल इंडिया' ने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने में मदद की जिसमें पहचान, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाएं बड़ी आबादी के स्तर पर काम कर सकें। भारत में अब 144 करोड़ से ज़्यादा आधार पहचान, 57.71 करोड़ जन धन खाते और एक बढ़ता हुआ डिजिटल नेटवर्क है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) इस बदलाव के सबसे प्रमुख प्रतीकों में से एक बन गया है। ट्रांज़ैक्शन की संख्या वित्त वर्ष 2016-17 में सालाना लगभग दो करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। DigiLocker, UMANG, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और BharatNet जैसे प्लेटफॉर्म ने सरकारी और ज़रूरी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई है। 2026 तक, BharatNet के तहत 2.21 लाख से ज़्यादा ग्राम पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया गया है, जबकि पांच लाख से ज़्यादा CSC डिजिटल सेवाएं दे रहे हैं।
बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) एक और मुख्य स्तंभ रहा है। भारत ने सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, जलमार्गों, आवास, ऊर्जा और शहरी परिवहन में निवेश बढ़ाया है। मार्च 2026 तक, रेलवे नेटवर्क का 99.6% हिस्सा बिजली से चलने वाला (इलेक्ट्रिफाइड) हो गया था, जबकि मेट्रो नेटवर्क का विस्तार 1,155 किलोमीटर से ज़्यादा हो गया है। इस प्रयास के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर भी ज़ोर दिया गया है। 'मेक इन इंडिया', प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और आत्मनिर्भर भारत फ्रेमवर्क का मकसद मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और इलेक्ट्रॉनिक्स व टेलीकम्युनिकेशन से लेकर फार्मास्यूटिकल्स और डिफेंस जैसे सेक्टर में रणनीतिक क्षमता बनाना रहा है। इस दौरान टेक्नोलॉजी और डायरेक्ट ट्रांसफर के ज़रिए सोशल वेलफ़ेयर (सामाजिक कल्याण) का दायरा भी बढ़ा है। घर, साफ़-सफ़ाई, खाना पकाने के लिए ईंधन, पीने का पानी, हेल्थ इंश्योरेंस और फ़ूड सिक्योरिटी जैसी स्कीमों ने बहुत बड़े पैमाने पर घरों की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश की है। 2026 के यूनियन कैबिनेट के एक प्रस्ताव में सरकार के इस दावे पर ज़ोर दिया गया कि इस दौरान 25 करोड़ से ज़्यादा लोग मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी (बहुआयामी गरीबी) से बाहर निकले हैं।
कोविड-19 महामारी ने गवर्नेंस (शासन-व्यवस्था) के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेश की। भारत ने CoWIN डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की मदद से दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीनेशन प्रोग्राम में से एक चलाया। इस प्रोग्राम के तहत 220 करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन डोज़ दी गईं, जबकि eSanjeevani जैसी डिजिटल हेल्थ पहलों ने टेलीमेडिसिन तक पहुँच बढ़ाई। एक और अहम पहलू ग्लोबल इकोनॉमिक और स्ट्रैटेजिक मौजूदगी को मज़बूत करने की कोशिश रही है। भारत ने खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज़, एक बड़ी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी, और क्लाइमेट एक्शन जैसी ग्लोबल पहलों में एक पार्टनर के तौर पर पेश किया है। 2023 में G20 प्रेसिडेंसी के सफल आयोजन ने भारत को इंटरनेशनल एजेंडा पर विकास से जुड़े मुद्दों, डिजिटल समावेश और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों को ज़्यादा प्रमुखता से रखने का प्लेटफ़ॉर्म दिया।
यह बदलाव भारत की टेक्नोलॉजी से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं में भी साफ़ दिखा है। डिजिटल पेमेंट और आधार से लेकर स्पेस एक्सप्लोरेशन, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, पॉलिसी का ज़ोर घरेलू क्षमताएँ विकसित करने पर रहा है। इस दौरान भारत के सफ़र में रोज़गार, असमानता, खेती से जुड़ी परेशानियाँ, फ़ेडरल संबंध, संस्थागत स्वायत्तता, सामाजिक एकजुटता और पब्लिक डिस्कोर्स (सार्वजनिक चर्चा) की गुणवत्ता जैसे मुश्किल सवाल भी सामने आए। भारत के आर्थिक विस्तार ने बड़े मौके पैदा किए हैं, लेकिन यह पक्का करना कि इस ग्रोथ से प्रोडक्टिव रोज़गार पैदा हों और फ़ायदा समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे, अभी भी एक चुनौती है।
अगला दौर इस बात से तय होगा कि क्या ये आधार प्रोडक्टिविटी, रोज़गार, मानव विकास और जीवन स्तर में लगातार सुधार ला सकते हैं या नहीं। 'विकसित भारत 2047' का राष्ट्रीय लक्ष्य इस चुनौती को एक लंबे समय के नज़रिए से देखता है। पीएम के तौर पर मोदी के कार्यकाल में हरियाणा में बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय निवेश और विकास की पहल हुई हैं। प्रमुख प्रोजेक्ट्स में गुरुग्राम मेट्रो, एम्स-रेवाड़ी, द्वारका एक्सप्रेसवे और रेलवे व हाईवे कनेक्टिविटी का विस्तार शामिल है। उनकी सरकार ने नई हेल्थकेयर, एनर्जी, एविएशन और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सपोर्ट किया है। 2026 में, हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन शुरू हुई, साथ ही लगभग ₹14,700 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी शुरू किए गए।
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