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भारत में स्पैम कॉल का आतंक, हरियाणा CM ने समझी नई तकनीक
Rajeshwari Nishad
17 Oct 2026 1:33 PM IST

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चंडीगढ़। मोबाइल फोन पर आने वाली अनचाही कॉल और स्पैम कॉल की समस्या से आम लोगों को राहत दिलाने के लिए हरियाणा सरकार नई तकनीकों की मदद लेने की दिशा में प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने शुक्रवार को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में विश्व प्रसिद्ध दूरसंचार कंपनी एरिक्सन और कॉल आइडेंटिफिकेशन कंपनी ट्रूकॉलर के मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर संचार क्षेत्र में इस्तेमाल की जा रही नवीनतम तकनीकों और मोबाइल फोन पर स्पैम कॉल की समस्या से निपटने के संभावित उपायों की जानकारी ली।
भारत में स्पैम कॉल की बढ़ती समस्या के बीच हरियाणा सरकार का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों को रोजाना अनचाही कॉल, प्रचार संबंधी फोन और संभावित धोखाधड़ी वाली कॉल का सामना करना पड़ता है। ऐसी कॉल न केवल लोगों का समय खराब करती हैं, बल्कि कई बार साइबर ठगी और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का कारण भी बन सकती हैं। ऐसे में तकनीक आधारित समाधान विकसित करना सरकारों और दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
भारत में स्पैम कॉल की समस्या गंभीर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में एक वर्ष के दौरान लगभग 770 करोड़ स्पैम कॉल किए जाने का आंकड़ा सामने आया है। यह संख्या समस्या के व्यापक स्तर को दर्शाती है। लगातार आने वाली अनचाही कॉल से मोबाइल उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। कई बार ठग बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते हैं और उन्हें अपनी बातों में उलझाने का प्रयास करते हैं।
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ मोबाइल फोन बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, खरीदारी और सरकारी सेवाओं का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में फोन पर आने वाली संदिग्ध कॉल की पहचान करना और उपभोक्ताओं को समय रहते सावधान करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। हरियाणा सरकार की ओर से स्वीडन की तकनीकी कंपनियों के कामकाज को समझने की पहल इसी व्यापक जरूरत के संदर्भ में देखी जा रही है।
एरिक्सन के मुख्यालय में संचार तकनीक की जानकारी
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मंत्री विपुल गोयल ने स्टॉकहोम स्थित एरिक्सन के मुख्यालय का दौरा कर दूरसंचार क्षेत्र में विकसित हो रही आधुनिक तकनीकों की जानकारी ली। एरिक्सन वैश्विक स्तर पर दूरसंचार नेटवर्क और संबंधित तकनीकी समाधानों के लिए जानी जाती है। मोबाइल नेटवर्क की क्षमता, नेटवर्क प्रबंधन, डिजिटल कनेक्टिविटी और संचार सेवाओं की गुणवत्ता जैसे क्षेत्रों में कंपनी की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण है।
दौरे के दौरान संचार तकनीक में हो रहे बदलावों और उनके संभावित उपयोगों को समझने पर जोर रहा। स्पैम कॉल की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नेटवर्क स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, कॉल की निगरानी और धोखाधड़ी रोकने वाली तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, हरियाणा में एरिक्सन की किसी तकनीक को लागू करने या कंपनी के साथ औपचारिक समझौता होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
ट्रूकॉलर के मुख्यालय में कॉल पहचान प्रणाली पर फोकस
दोनों नेताओं ने कॉल आइडेंटिफिकेशन कंपनी ट्रूकॉलर के मुख्यालय का भी दौरा किया। ट्रूकॉलर मोबाइल फोन पर कॉल करने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान बताने और संभावित स्पैम कॉल के बारे में उपयोगकर्ताओं को चेतावनी देने वाली सेवाओं के लिए जानी जाती है।
इस प्रकार की तकनीक मोबाइल उपभोक्ताओं को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल के बारे में अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है। संदिग्ध नंबरों की पहचान, स्पैम के रूप में रिपोर्ट की गई कॉल का विश्लेषण और संभावित धोखाधड़ी के प्रति चेतावनी जैसे विकल्प उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।
हरियाणा सरकार के प्रतिनिधियों का ट्रूकॉलर के मुख्यालय पहुंचना इस दृष्टि से अहम है कि कॉल की पहचान और स्पैम की रोकथाम से जुड़ी तकनीकों को समझकर भविष्य में राज्य के लिए उपयोगी विकल्पों का आकलन किया जा सकता है। हालांकि, इन तकनीकों को सरकारी स्तर पर अपनाने के लिए उनकी प्रभावशीलता, निजता की सुरक्षा, लागत और मौजूदा दूरसंचार व्यवस्था के साथ उनकी अनुकूलता का मूल्यांकन जरूरी होगा।
साइबर सुरक्षा और नागरिकों की निजता भी अहम
स्पैम कॉल रोकने की किसी भी व्यवस्था में केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा और वैध कॉल को गलती से स्पैम घोषित होने से बचाना भी आवश्यक है। कई बार बैंक, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और अन्य संस्थान जरूरी जानकारी देने के लिए ऐसे नंबरों से संपर्क करते हैं, जो उपभोक्ता के फोन में सेव नहीं होते। इसलिए किसी भी नई प्रणाली को इस तरह तैयार करना जरूरी होगा कि वह संदिग्ध कॉल की पहचान करते हुए सामान्य संचार को प्रभावित न करे।
इसके अलावा, दूरसंचार नेटवर्क, कॉल पहचान सेवाओं और संबंधित नियामकीय व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल से स्पैम कॉल के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। भारत में दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े नियमों और उपभोक्ता शिकायत निवारण की मौजूदा व्यवस्था के साथ नई तकनीकों का समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा।
हरियाणा में तकनीक आधारित समाधान की संभावनाएं
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मंत्री विपुल गोयल का स्वीडन दौरा हरियाणा में आधुनिक संचार तकनीकों की संभावनाओं को समझने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। एरिक्सन और ट्रूकॉलर जैसी कंपनियों के अनुभव से राज्य सरकार को नेटवर्क आधारित सुरक्षा और कॉल पहचान प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की जानकारी मिल सकती है।
फिलहाल, राज्य में स्पैम कॉल रोकने के लिए किसी विशेष तकनीक को लागू करने, पायलट परियोजना शुरू करने या कंपनियों के साथ समझौता किए जाने की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दौरे को संभावित तकनीकी सहयोग और नई व्यवस्थाओं के अध्ययन की पहल के रूप में देखना उचित होगा।
स्पैम कॉल पर प्रभावी नियंत्रण से मोबाइल उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ-साथ साइबर धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वीडन की इन कंपनियों से मिली जानकारी को हरियाणा में किस तरह उपयोगी बनाया जाता है और क्या भविष्य में इस दिशा में कोई ठोस योजना सामने आती है।
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