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पंजाब विधानसभा में गूंजा करतारपुर गलियारा दोबारा खोलने का मुद्दा

Admindelhi1
28 Oct 2026 12:47 PM IST
पंजाब विधानसभा में गूंजा करतारपुर गलियारा दोबारा खोलने का मुद्दा
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पंजाब विधानसभा में करतारपुर गलियारे को लेकर चर्चा

चंडीगढ़: श्री गुरु नानक देव जी के ‘सर्वजन के कल्याण’ के संदेश को प्रमुखता देते हुए पंजाब के शिक्षा एवं सूचना एवं लोक संपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। इसमें केंद्र सरकार से श्री करतारपुर साहिब गलियारे को दोबारा खोलने और इसे निरंतर खुला रखने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यह गलियारा भारत और पाकिस्तान के बीच केवल एक कूटनीतिक मार्ग नहीं है, बल्कि लाखों सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक स्वतंत्रता और मानवीय एकता से जुड़ा विषय है।

इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि केंद्र सरकार गलियारे को दोबारा खोलने और इसे चालू रखने के लिए तत्काल कदम उठाए। तीर्थयात्रा की प्रक्रियाओं को सरल बनाए तथा पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत करे, ताकि श्रद्धालुओं की पाकिस्तान स्थित करतारपुर के गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब तक सुरक्षित, सुचारु और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

विधानसभा में संबोधित करते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि श्री करतारपुर साहिब ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ के सिद्धांतों की आधारभूमि है। यह गलियारा केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि ऐसा सेतु है, जो सिख संगत को उस पवित्र धरती से दोबारा जोड़ता है, जहां हमारे गुरु साहिब ने अपने चरण रखे थे।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण समय करतारपुर साहिब में बिताया और मानवता को समानता, सेवा, भाईचारे तथा ‘सर्वजन के कल्याण’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह गलियारा लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं और वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान बिछड़े परिवारों के दर्द का प्रतिनिधित्व करता है।

मंत्री हरजोत बैंस ने कहा, “गुरु साहिब का संदेश सभी धर्मों और संपूर्ण मानवता के लिए है, जो सीमाओं से परे है। उनकी वाणी मानवता को प्रेम, सद्भावना, सहिष्णुता और शांति का मार्ग दिखाती है। इसलिए श्री करतारपुर साहिब गलियारे को खुला रखना धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय एकता और पंजाब की साझा विरासत के सम्मान से जुड़ा विषय है।

‘नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला’की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए स. हरजोत सिंह बैंस ने इस गलियारे को आपसी विश्वास, शांति, जनसंपर्क और साझा विरासत का जीवंत प्रतीक बनाए रखने के लिए निरंतर एवं ईमानदार प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

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