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सात समंदर पार तक पहुंची सनातन संस्कृति की पहचान : दविंदर स्वामी

Admindelhi1
23 Oct 2026 10:08 AM IST
सात समंदर पार तक पहुंची सनातन संस्कृति की पहचान : दविंदर स्वामी
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दविंदर स्वामी ने विदेशों में सनातन संस्कृति की जीवंतता पर दिया जोर

सोनीपत: भारतीय सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं का प्रभाव देश की सीमाओं से परे भी दिखाई दे रहा है। विदेशों में रह रहे लोग भारतीय आध्यात्मिक विचारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़कर अपनी जड़ों को मजबूत कर रहे हैं। यह बात पुर्तगाल से आए अंतरराष्ट्रीय सूर्यवंशी अखाड़ा परिषद के पीठाधीश्वर अनंत विभूषित आचार्य महामंडलेश्वर दविंदर स्वामी सूर्यवंशी ने मुरथल में कही।

गुरुवार को महामंडलेश्वर सीताराम सूर्यवंशी ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में माता जय श्री जी, ब्राजील से आए महंत प्रदीप कुमार, महंत संजय कुमार, मनीष, सतीश, यशपाल, जतीन और अधिवक्ता तान्या सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

यूरोप में वैदिक विचारों के प्रसार पर जोर

दविंदर स्वामी सूर्यवंशी ने कहा कि सनातन संस्कृति किसी एक देश या भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसकी शिक्षाएं मानवता, सेवा, सदाचार और आपसी भाईचारे का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में भी सनातन धर्म के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय सूर्यवंशी अखाड़ा परिषद के माध्यम से भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और वैदिक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यूरोप में आध्यात्मिक गतिविधियों का विस्तार होगा और सनातन संस्कृति का संदेश विभिन्न देशों तथा समुदायों तक पहुंचेगा।

लिस्बन का आश्रम बना आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र

स्वामी ने बताया कि पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन के साकावेम क्षेत्र में स्थित आश्रम भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र है। यहां पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से लोगों को मानसिक शांति और संतुलित जीवन का संदेश दिया जाता है।

आश्रम में भगवान शनिदेव और भगवान महाकाल की आराधना के साथ कर्मों की महत्ता, ईमानदारी तथा जरूरतमंदों की सेवा पर विशेष जोर दिया जाता है।

सेवा, सदाचार और प्रकृति संरक्षण भी धर्म का हिस्सा

दविंदर स्वामी ने कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। अच्छे कर्म करना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाना भी धार्मिक मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है। सनातन परंपरा पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भावना पर आधारित है। इसी विचार के जरिए विभिन्न देशों और समुदायों के लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और पौधे लगाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, प्रकृति का सम्मान भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। आधुनिक जीवन में भौतिक सुविधाओं के साथ मानसिक शांति और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

मुरथल में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार और भारतीय परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने को लेकर विचार साझा किए गए। वक्ताओं ने कहा कि विदेशों में संचालित धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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