
अंबाला। रेल यात्रियों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहने वाली राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जवान खुद असुरक्षित भवन में काम करने को मजबूर हैं। जिस भवन में जीआरपी थाना, पुलिसकर्मियों के रहने की बैरक और सीआईए स्टाफ का कार्यालय संचालित हो रहा है, उसे मानव उपयोग के लिए पूरी तरह खतरनाक घोषित किया जा चुका है। रेलवे के निर्माण विभाग ने इन भवनों को तत्काल प्रभाव से खाली करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद वैकल्पिक भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण जीआरपी के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए जीआरपी अधिकारियों ने मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को पत्र लिखकर नए भवन की मांग की है।
यात्रियों की सुरक्षा करने वाले जवान खुद असुरक्षित
रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जीआरपी के जवानों पर होती है। यात्रियों के सामान की चोरी, आपराधिक घटनाओं और अन्य सुरक्षा संबंधी मामलों में जीआरपी की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
पुलिसकर्मियों को दिन-रात ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में थाना परिसर और आवासीय बैरक का सुरक्षित होना बेहद जरूरी है।
लेकिन वर्तमान स्थिति में जीआरपी के जवान जिस भवन का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे मानव उपयोग के लिए खतरनाक घोषित किया जा चुका है।
इससे कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
निर्माण विभाग ने जारी किए निर्देश
रेलवे के निर्माण विभाग ने जीआरपी थाना, बैरक और सीआईए स्टाफ से संबंधित भवनों को तत्काल खाली करने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्देश भवनों को मानव उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद जारी किए गए हैं।
किसी भवन को इस श्रेणी में रखे जाने का अर्थ है कि उसका नियमित उपयोग करने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है।
हालांकि, भवनों में कौन-कौन सी तकनीकी खामियां पाई गई हैं, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह भवनों की उम्र और उनकी पिछली मरम्मत से संबंधित जानकारी भी सामने नहीं आई है।
जीआरपी थाना खाली करने की बड़ी चुनौती
रेलवे के निर्देशों के बाद जीआरपी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या थाना संचालन के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जीआरपी के पास दूसरा कोई भवन नहीं है, जहां थाने का कामकाज स्थानांतरित किया जा सके।
थाने में रोजमर्रा की प्रशासनिक गतिविधियों के साथ सुरक्षा संबंधी कार्य भी संचालित होते हैं।
ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के भवन खाली करना व्यावहारिक चुनौती बन गया है।
दूसरी ओर, असुरक्षित घोषित भवन में काम जारी रखना कर्मचारियों के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
बैरक में रहने वाले पुलिसकर्मियों की चिंता
जीआरपी थाना परिसर के साथ पुलिसकर्मियों के रहने की बैरक भी असुरक्षित घोषित भवनों में शामिल है।
बैरक में पुलिसकर्मी ड्यूटी के बाद विश्राम करते हैं और अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करते हैं।
लगातार सुरक्षा ड्यूटी करने वाले जवानों के लिए सुरक्षित आवासीय व्यवस्था आवश्यक होती है।
यदि बैरक का भवन उपयोग के योग्य नहीं है, तो कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की जरूरत पड़ सकती है।
हालांकि, बैरक में वर्तमान में कितने पुलिसकर्मी रह रहे हैं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सीआईए स्टाफ का कार्यालय भी प्रभावित
असुरक्षित घोषित भवनों में सीआईए स्टाफ का कार्यालय भी शामिल है।
इससे केवल जीआरपी थाना ही नहीं, बल्कि उससे संबंधित अन्य पुलिस इकाइयों के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका है।
कार्यालयों को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त स्थान, आवश्यक सुविधाएं और दस्तावेजों की सुरक्षित व्यवस्था जरूरी होती है।
यदि वैकल्पिक भवन समय पर उपलब्ध नहीं होता, तो प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में परेशानी आ सकती है।
हालांकि, अभी किसी विशेष पुलिस कार्य के बाधित होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
डीआरएम को पत्र लिखकर मांगा नया भवन
जीआरपी अधिकारियों ने समस्या के समाधान के लिए मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखा है।
पत्र के माध्यम से नए भवन की मांग की गई है, ताकि थाना और संबंधित इकाइयों को सुरक्षित स्थान पर संचालित किया जा सके।
अधिकारियों के सामने दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। पहली, पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी, यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों को बिना बाधा जारी रखना।
नए भवन की उपलब्धता इन दोनों जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, डीआरएम कार्यालय की ओर से पत्र पर क्या जवाब दिया गया है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
चौबीस घंटे चलती हैं पुलिस की गतिविधियां
जीआरपी की जिम्मेदारी सामान्य कार्यालयों से अलग होती है। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही दिन और रात दोनों समय होती रहती है।
इसी कारण जीआरपी को चौबीसों घंटे सक्रिय रहना पड़ता है।
किसी आपात स्थिति में पुलिसकर्मियों को तत्काल कार्रवाई करनी होती है।
थाने का सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान पर होना इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि यात्रियों को जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता आसानी से मिल सके।
यदि थाने को दूसरे भवन में स्थानांतरित किया जाता है, तो उसकी पहुंच और आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।
असुरक्षित भवन में काम करने का जोखिम
मानव उपयोग के लिए खतरनाक घोषित भवनों में नियमित गतिविधियां जारी रखना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है।
भवन की वास्तविक स्थिति के आधार पर दुर्घटना का जोखिम अलग-अलग हो सकता है।
विशेषज्ञों द्वारा असुरक्षित घोषित भवनों का इस्तेमाल रोकना और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाना महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि, मौजूदा भवन में किसी दीवार के गिरने, छत क्षतिग्रस्त होने या अन्य दुर्घटना की जानकारी नहीं दी गई है।
इसलिए किसी संभावित हादसे को निश्चित घटना के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
जीआरपी का काम रेलवे यात्रियों को सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए पुलिसकर्मियों का सुरक्षित वातावरण में काम करना आवश्यक है।
यदि थाना भवन और बैरक की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो कर्मचारियों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
थाने का स्थानांतरण भी सावधानीपूर्वक करना होगा, ताकि यात्रियों की शिकायतों और सुरक्षा संबंधी कार्यों में बाधा न आए।
हालांकि, वर्तमान में यात्रियों की सुरक्षा सेवाएं प्रभावित होने की कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नए भवन की व्यवस्था जरूरी
जीआरपी अधिकारियों द्वारा नए भवन की मांग किए जाने के बाद अब वैकल्पिक व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है।
रेलवे प्रशासन और संबंधित पुलिस अधिकारियों के बीच समन्वय से समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
नया भवन उपलब्ध होने तक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त अंतरिम व्यवस्था की जरूरत भी पड़ सकती है।
हालांकि, रेलवे प्रशासन ने किसी अस्थायी भवन की पहचान की है या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
निर्देश जारी, लेकिन विकल्प नहीं
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी समस्या यह है कि रेलवे के निर्माण विभाग ने भवनों को तत्काल खाली करने के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन जीआरपी के पास फिलहाल दूसरा भवन उपलब्ध नहीं है।
इससे पुलिस अधिकारियों के सामने प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी चुनौती खड़ी हो गई है।
रेल यात्रियों की जान-माल की सुरक्षा में तैनात जीआरपी जवानों के लिए सुरक्षित थाना परिसर और बैरक उपलब्ध कराना जरूरी है। अब डीआरएम को भेजे गए पत्र पर निर्णय और नए भवन की उपलब्धता से ही इस समस्या के स्थायी समाधान का रास्ता साफ हो सकेगा।





