हरियाणा

हुड्डा से मतभेद के बीच सैनी-कुलदीप शर्मा की मुलाकात की चर्चा

nidhi
3 Nov 2026 9:40 AM IST
हुड्डा से मतभेद के बीच सैनी-कुलदीप शर्मा की मुलाकात की चर्चा
x
CM सैनी से चाय पर मुलाकात की खबर
चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चाय पर मुलाकात की जानकारी सामने आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय चर्चा में आया है, जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और सामूहिक भागीदारी को लेकर शर्मा के रुख पर पहले से बहस चल रही है। हालांकि, उपलब्ध स्रोतों से इस मुलाकात की तारीख, स्थान और बातचीत के विषयों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कुलदीप शर्मा पिछले कुछ समय से कांग्रेस में सामूहिक नेतृत्व की पैरवी करते रहे हैं। अक्टूबर में प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इस विषय पर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने प्रदेश प्रभारी के सामने भी आगामी विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ने का सुझाव दिया था। इसी पृष्ठभूमि में उनके और हुड्डा खेमे के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा हुई। अगस्त में भी शर्मा ने पार्टी में सभी नेताओं को स्थान देने की बात कही थी। दैनिक ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कांग्रेस को किसी एक व्यक्ति की पार्टी मानने के बजाय सभी की भागीदारी वाला संगठन बनाने पर जोर दिया। उनके इस रुख से प्रदेश कांग्रेस की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व के सवाल सार्वजनिक चर्चा में आए थे।
दूसरी ओर, शर्मा की हालिया कांग्रेस गतिविधियों का उल्लेख भी सामने आया है। तीस अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, महेंद्रगढ़ के जिला कांग्रेस प्रभारी के रूप में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और एक नवंबर को दिल्ली में आयोजित रैली के लिए भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया था। यह उनकी पार्टी संबंधी सक्रियता का विवरण है; इसके आधार पर किसी भविष्य के राजनीतिक निर्णय का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
मुख्यमंत्री से किसी विपक्षी नेता की मुलाकात अपने आप में दल बदलने या राजनीतिक समझौते का प्रमाण नहीं होती। इसके मायने संबंधित नेताओं के बयान और मुलाकात के वास्तविक उद्देश्य से स्पष्ट होते हैं। फिलहाल शर्मा के कांग्रेस छोड़ने, भाजपा में शामिल होने अथवा किसी नई राजनीतिक भूमिका पर सहमति बनने की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए सैनी और शर्मा की कथित मुलाकात को लेकर निश्चित राजनीतिक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आधिकारिक बयान या प्रमाणित विवरण मिलने के बाद ही बताया जा सकेगा कि बातचीत शिष्टाचार तक सीमित थी या उसमें किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा हुई।
Next Story